ग्रामीण क्षेत्रों में भी दशहरा पर्व को लेकर तैयारियां पूर्ण कर ली गई। पर्व को लेकर इसे लेकर क्षेत्र के लोगों में खासा उल्लास भी दिख रहा है।
असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाए जाने वाले दशहरा पर्व की खुशियां एक दिन पहले ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में दिखने लगी थीं। कहीं रावण का पुतला तैयार किया जा रहा था, तो कहीं राम रावण युद्ध के रोचक मंचन की तैयारियां होती दिखीं। जिले के कुछ स्थानों पर इस दिन मेले के आयोजन की भी परंपरा है।
अकबरपुर नगर के शहजादपुर में बीते कई वर्षों से दशहरा पर्व पर भव्य मेले का आयोजन होता है। मेले के लुत्फ लेने के साथ यहां का रावण पुतला दहन लोगों के बीच काफी आकर्षण का केन्द्र रहता है। सतगुरु कृपा देवी रामलीला समिति के अध्यक्ष अवधेश मेहरोत्रा ने बताया कि इस आयोजन में इनका पूरा परिवार शामिल होता है।
करीब 40 वर्षों से यह आयोजन उनके परिवार द्वारा किया जाता आ रहा है। 11 दिनों तक रामलीला का मंचन होता है। विजय दशमी पर्व के मौके पर रावण वध का मंचन किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। कलाकारों द्वारा निर्मित पुतले का दहन कर असत्य पर सत्य की जीत की खुशियां मनायी जाती हैं।
अकबरपुर नगर के इल्तिफातगंज रोड पर चल रही रामलीला का समापन विजय दशमी पर भव्य मेले व रावण पुतला दहन के साथ होगा। यहां भी विजयदशमी का पर्व कुछ इसी अंदाज में मनाया जाता है। टांडा, आलापुर, बसखारी, बेवाना, कटेहरी व भीटी आदि क्षेत्रों में भी विजय दशमी पर्व की तैयारियां लगभग एक दिन पूर्व ही पूरी कर ली गई।
राम रावण युद्ध का मंचन देखने के लिए युवाओं में काफी उत्सुकता रहती है। टांडा में भी रामलीला आयोजन का विशेष प्रबंध किया गया है। बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप मनने वाले इस जश्न पर लोग अपने अपने घरों पर घी के दीप भी जलाते हैं।
मान्यता है कि इसी दिन भगवान राम का 14 वर्ष वनवास पूरा हुआ था और वह रावण का वध कर अयोध्या लौटे थे। इस दिन अयोध्यावासियों ने घी के दीप जलाए थे। रावण वध व मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर प्रशासन ने भी कमर कस लिया है।