कलेक्ट्रेट में एडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठै किसान व कलेक्ट्रेट से आंबेडकर प्रतिमा की ओर
अंबेडकरनगर। एनएच 233 के निर्माण के दौरान अपनी जमीन गंवाने वाले सैकड़ों किसानों ने कम मुआवजा देने की बात पर शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव करते हुए एडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। किसानों की भारी भीड़ देख प्रशासन को पुलिस बुलानी पड़ी। इसके बाद किसानों को कलेक्ट्रेट से डॉ. आंबेडकर प्रतिमा परिसर ले जाया गया। इस पूरे प्रकरण में डीएम अनुपम शुक्ला ने मामला सुप्रीम कोर्ट स्तर पर लंबित होने की बात कही।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के बैनर तले पहुंचे किसानों से एडीएम डॉ. सदानंद गुप्ता ने 36 हजार रुपये बिस्वा मुआवजा देने की बात कही, जिस पर किसान भड़क गए और वहीं प्रदर्शन करने लगे।
किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। कुछ देर में ही अकबरपुर कोतवाल श्रीनिवास पांडेय के साथ बड़ी संख्या में पुलिस के जवान आ गए और कलेक्ट्रेट छावनी बन गया। काफी मशक्कत के बाद किसानों को बाहर लाया गया।
इस दौरान किसान नारेबाजी करते आंबेडकर प्रतिमा के पास आ गए। जिलाध्यक्ष विनोद कुमार वर्मा ने बताया कि अगला निर्णय आठ अक्तूबर को होने वाली पंचायत में लिया जाएगा।
शाम को डीएम अनुपम शुक्ला ने बताया कि इस प्रकरण में एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में है, जिसमें आगामी सात अक्तूबर को सुनवाई होनी है। किसानों से अपील है कि वह उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखें।
ये है पूरा प्रकरण
वाराणसी से लुबिनी नेपाल तक जाने वाले नेशनल हाईवे 233 निर्माण के समय टांडा और आलापुर तहसील क्षेत्र के 43 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई थी। 23 गांवों के एक हजार से अधिक किसान आज भी मुआवजे की लड़ाई लड़ रहे हैं। टांडा के बहलोलपुर स्थित ओवरब्रिज के पास भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले लंबे समय से धरना प्रदर्शन चल रहा है। पूर्व में यहां किसान महापंचायतें भी हो चुकी हैं। इसके अलावा करीब 1300 मामले डीएम कोर्ट में दाखिल हुए, जिनमें करीब एक हजार का निस्तारण किया जा चुका है। किसानों की मांग है कि उन्हें आवासीय दर पर मुआवजा मुहैया कराया जाए।
कलेक्ट्रेट में एडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठै किसान व कलेक्ट्रेट से आंबेडकर प्रतिमा की ओर