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झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिले

Fri, 24 Jul 2015 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
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इस दौरान विद्युत आपूर्ति घंटों बाधित रही। पालिका प्रशासन की लापरवाही के चलते लोग जल निकासी न होने से परेशान रहे। जलभराव के चलते लोगों को आवागमन में दिक्कत हुई। उधर इस बारिश से धान किसानों को काफी राहत मिली है।
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बीते कई दिनों से जिले में बादलों के उमड़ने से बरसात के आसार नजर आ रहे थे। एक दो बार बूंदाबादी भी हुई थी लेकिन जोरदार बारिश न होने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही थी। लोग उमस व गर्मी से परेशान तो थे ही किसानों को भी चिचाई के लिए पानी की जरूरत बनी हुई थी।

इस दौरान बारिस न होने से किसानों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी थीं।  शुक्रवार की सुबह की शुरुात भी कड़ी धूप से ही हुई। दोपहर तक तेज उमस व गर्मी का सिलसिला जारी था। दोपहर बाद आसमान पर काले बादल छाने लगे। कुछ ही देर में जिला मुख्यालय समेत अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों मेें बरसात शुरू हो गई।
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मूसलाधार बारिश से लोगों के चेहरे खिल उठे।  जिला मुख्यालय पर अपराह्न दो बजे के बाद से बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। पहले रिमझिम बारिश फिर कई चरण में तेज बारिश हुई।  कुछ देर बाद ही जिला मुख्यालय पर तेज बारिश का दौर थम गया, लेकिन बूंदाबांदी का दौर चलता रहा।

बारिश के चलते जिला मुख्यालय के फैजाबाद मार्ग, बस स्टेशन, पटेलनगर, टांडा मार्ग आदि क्षेत्रों में जल भराव की स्थिति बनी रही। नगर परिषद इन क्षेत्रों में लम्बे समय से जल निकासी का समुचित प्रबंध करने को लेकर विफल रहा है।
उधर जाफरगंज, टांडा, राजेसुल्तानपुर, बेवाना, कटेहरी, भीटी व अन्य अन्य क्षेत्रों में भी झमाझम बारिश हुई। तेज बारिश होने से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी व उमस से लोगों को राहत मिली।  अकबरपुर नगर के शहजादपुर, फैजाबाद मार्ग, पटेलनगर व कृष्णानगर आदि कालोनी में विद्युत आपूर्ति तीन से चार घंटे तक ठप रही।

इससे पेयजल को लेकर भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विद्युत चालित लघु उद्योगों पर भी व्यापक असर पड़ा। इस बीच कई दिनों के बाद हुई बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर ली थी, उनके लिए यह बारिश अमृत की बूंद साबित हुई।

बारिश न होने पर उन्हें अब वैकल्पिक माध्यमों से सिंचाई करना ही पड़ता, लेकिन अब उनकी जरूरत पूरी हो गई। अकबरपुर के किसान रामभेज वर्मा व संतोषी ने बताया कि इस बारिश ने किसानों का सैकड़ों रुपए बचाया है। सिंचाई की वैकल्पिक प्रबंध करने की चिंता भी कुछ दिन के लिए दूर हो गई है।
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