प्रकृति की मार से त्रस्त किसानों को कृषि विभाग से समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। धान बीज खरीदने के बाद किसान सब्सिडी का लाभ पाने के लिए आए दिन बैंक व विभाग का चक्कर लगाने को विवश हैं। बीते दिनों लगभग 6700 किसानों ने सरकारी स्तर पर धान बीज खरीदे, लेकिन अभी तक लगभग डेढ़ हजार किसानों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल सका है।
वहीं, अब तक जिले के राजकीय बीज भंडारों पर ब्यूटाक्लोर, माइक्रोन्यूटियंट व कीटनाशक दवाओं की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इससे किसान आए दिन कृषि बीज भंडारों का चक्कर काट रहे हैं। ब्यूटाक्लोर आदि धान की फसल में डालने का समय भी अब बीत चुका है। इससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है।
शासन-प्रशासन भले ही किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे कर रहा हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका समुचित लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। कृषि विभाग से संबंधित सामान खरीदने के बाद सरकार द्वारा किसानों के खाते में सब्सिडी भेजने का प्रावधान है। विभाग की देखरेख में जिले के विभिन्न ब्लॉकों में स्टॉल लगाकर धान के बेरन के लिए बीज की ब्रिकी की गई थी।
नौ ब्लॉकों में करीब 6700 किसानों ने स्टाल के माध्यम से बीज खरीदकर सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। लापरवाही की हद ये कि 15 दिन में मिलने वाली सब्सिडी महीनों बाद भी नहीं मिल सकी है। डेढ़ हजार से अधिक किसानों को सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाया है।
हालांकि विभाग के मुताबिक लगभग 15 प्रतिशत किसानों को ही सब्सिडी नहीं मिली है। विभाग का कहना है कि जिन किसानों को सब्सिडी नहीं मिली है, उनके कागजातों में त्रुटि है। उनमें सुधार कराया जा रहा है, जल्द ही भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाएगा।
एक तरफ किसान धान बीज की सब्सिडी पाने के लिए विभाग का चक्कर काट रहे हैं, तो दूसरी तरफ विभाग की उदासीनता के चलते किसानों को धान की रोपाई के बाद खरपतवार नाशक ब्यूटाक्लोर दवा के लिए परेशान होना पड़ रहा है। रोपाई का समय समाप्त हो गया, लेकिन ये दवा केंद्रों पर नहीं पहुंची।
कीटनाशक दवाएं व माइक्रो न्यूट्रियंट दवा भी बीज भंडारों पर नहीं पहुंच पाई हैं। अब किसानों को दवाओं के लिए निजी दुकानदारों का सहारा लेना पड़ रहा है। किसान रामजीत यादव व महेंद्र शुक्ल ने विभाग पर उदासीनता का आरोप लगाया है। कहा कि विभागीय उदासीनता के चलते ही किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उधर, कृषि विभाग के खाद्य सुरक्षा सलाहकार से जुड़े प्रभारी अनुज कुमार सिंह का कहना है कि बीज भंडारों पर दवाओं की उपलब्धता का प्रयास चल रहा है। वैसे भी किसान प्राइवेट दुकानों से दवा खरीद सकते हैं और उसके बिल सहित आवेदन पत्र ब्लॉक कार्यालय में जमा कर दें। उनके खाते में शासन से स्वीकृत दवाओं की सब्सिडी राशि भेज दी जाएगी।