राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। करीब एक दशक पहले राजेसुल्तानपुर क्षेत्र में शुरू हुई तंबाकू की खेती अब किसानों की तरक्की का माध्यम बन गई है। छह माह की खेती में किसान प्रति बीघा 50 हजार रुपये तक की बचत कर रहे हैं। इससे एक तरफ जहां किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं वहीं क्षेत्र की महिलाओं व पुरुषों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिल रहा है।
जिले के पूर्वी छोर पर स्थित राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र विकास के मामले में अभी काफी पीछे है। हालांकि यहां के किसान खेती के बलबूते अपनी पहचान बना रहे हैं। बलरामपुर, सिसवा, सिरसिया, जनेसरी, बनकटा, धारूपुर, माधवपुर, साबितपुर, टड़वा, पदुमपुर, सिंघलपट्टी, लालमनपुर, निकसपुर, बिजली पंडौली, गढ़वल, सराय हंकार, रतिगरपुर, पाठकपुर व शंकरपुर बर्जी सहित दर्जन भर से अधिक गांवों में इन दिनों 500 बीघा से अधिक क्षेत्रफल में तंबाकू की खेती की जा रही है। किसान 8 से 10 हजार रुपये में दूसरों का खेत समझौते पर ले रहे हैं।
तंबाकू की खेती से किसान जहां अच्छी आमदनी कर रहे हैं वहीं इस क्षेत्र में रोजगार का संकट भी मजदूरों के लिए नहीं है। पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी यहां भरपूर काम मिल रहा है। इससेे मजदूर वर्ग के लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है। चार हजार से अधिक लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं। (संवाद)
छह माह में तैयार हो जाती फसल
बलरामपुर गांव के किसान योगेंद्र निषाद व तिहाइतपुर के किसान हरीराम वर्मा बताते हैं कि तंबाकू की पौध अक्तूबर व नवंबर माह में लगायी जाती है। मार्च से अप्रैल माह में इसकी कटाई की जाती है। प्रति बीघा फसल तैयार करने में 35 से 40 हजार रुपये का खर्च आता है। मौसम ने साथ दिया तो प्रति बीघा 4 से 5 क्विंटल तंबाकू तैयार होती है। बाजार के हिसाब से लगभग 17 से 18 हजार रुपये प्रति क्विंटल में इसकी बिक्री होती है। राजेसुल्तानपुर में तैयार तंबाकू को खरीदने के लिए प्रदेश के गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर के अलावा बिहार के कई जिले तक के व्यापारी आते हैं।
बारिश ने पहुंचाया नुकसान
बेमौसम की बारिश ने इस बार तंबाकू की खेती करने वाले किसानों को नुकसान पहुंचाया है। किसान राजेंद्र व शिवपूजन का कहना है कि बारिश से काफी पौध कटने से पहले ही खेतों में ही सूख गए। इससे उत्पादन में कमी आना तय है। हालांकि इसके बावजूद किसानों ने अच्छे मुनाफे की उम्मीद लगा रखी है।