अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने के लिए फैकल्टी के 38 पद पर शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं स्टाफ नर्स के 168 रिक्त हैं जबकि फार्मासिस्ट के 12 पदों पर तैनाती नहीं है। एक्सरे टेक्नीशियन के सात पदों में मात्र एक पर तैनाती है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई के साथ मरीजों के इलाज में भी दिक्कत हो रही है।
एक दशक पूर्व जब सद्दरपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई और संचालन शुरू हुआ तो मरीजों को उम्मीद बंधी थी कि उनकाे जिले में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। हालांकि समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदें टूटने लगीं। कारण यह कि न तो सभी प्रकार की जांचों की सुविधा मेडिकल कॉलेज में है और न ही स्टाफ पूरा है।
मेडिकल कॉलेज में लगभग 600 मेडिकल छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन्हें बेहतर शिक्षा देने के लिए फैकल्टी के 104 पद सृजित हैं लेकिन 66 पर ही तैनाती है। एक दशक बाद भी 38 पदों पर तैनाती नहीं हो सकी है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। समय-समय पर रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा जाता है लेकिन अब तक इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई गई। नतीजा यह है कि इसका खामियाजा मेडिकल छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। इसका असर पढ़ाई के अलावा मरीजों के उपचार में भी देखने को मिलता है।
अन्य स्टाफ की भी कमी
राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों को भी बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि स्टाफ नर्स के 255 पद सृजित हैं, इसमें मात्र 87 पद पर ही तैनाती है। 168 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। फार्मासिस्ट के 15 पद सृजित हैं, मात्र तीन पर तैनाती है व 12 पद रिक्त है। वरिष्ठ सहायक के 33 पदों की तुलना में 17 रिक्त चल रहे हैं। एक्सरे जांच के लिए टेक्नीशियन के सात पद तो सृजित हैं लेकिन मात्र एक पर ही तैनाती है। छह पद रिक्त हैं।
शासन को भेजा पत्र
जो पद रिक्त हैं उन पर तैनाती के लिए कई बार पत्र भेजा जा चुका है। शिक्षण कार्य व ओपीडी प्रभावित न हो इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। - डॉ. अमीरुल हसन, प्राचार्य