अंबेडकरनगर/सद्दरपुर। अहिरौली इलाके के जरूखा प्रतापपुर चमुर्खा में शुक्रवार सुबह किसान राजितराम (56) खेतों के किनारे मेड़ों पर लगी इलेक्ट्रिक झटका मशीन के करंट की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौत हो गई।
राजितराम शुक्रवार सुबह छह बजे अपने धान के खेत देखने पहुंचे थे। खेतों को मवेशियों से बचाने के लिए उन्होंने और उनके भाइयों ने झटका मशीन लगा रखी थी। दातून तोड़ते समय वह पड़ोस के खेत की झटका मशीन की चपेट में आए और तारों से करंट लगने से बुरी तरह झुलस गए। उनकी चीख सुनकर आसपास के लोगों ने परिजनों को खबर दी। परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी मनोकामना देवी का बुरा हाल है। मृतक की चार संतानों में दो बेटियों का विवाह हो चुका है। उनके बेटों के नाम हिमांशु (28) और मोहित सहाय (25) हैं।
बताया जा रहा है कि मृतक के परिवार के लोगों ने ही खेत में झटका मशीन लगा रखी थी। इसी वजह से परिजन अभी कुछ भी स्पष्ट जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। थानाध्यक्ष दिनेश सिंह ने बताया कि झटका मशीन से मौत होने की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि परिजन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। तहरीर मिलने पर मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
झटका मशीनों का बढ़ता जाल
झटका मशीन एक इलेक्ट्रिक उपकरण है जो बैटरी या सीधे बिजली से करंट सप्लाई करता है। इसके आउटपुट तार खेत या छत पर लकड़ी या प्लास्टिक के माध्यम से फैलाए जाते हैं। जब इन तारों में करंट दौड़ता है, तो पशु खेत की फसल तक नहीं जाते। यह मशीन बेसहारा पशुओं को झटका देकर दूर रखती है। गांव से लेकर शहरों तक इसका प्रयोग मवेशियों और बंदरों को रोकने के लिए हो रहा है। इन मशीनों के लिए न तो कोई लाइसेंस लिया जाता है और न ही सुरक्षा चेतावनी दी जाती है।
पहले भी हो चुकी हैं मौतें
जिले में झटका मशीनों से पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं। 22 जनवरी 2025 को जलालपुर के कैथा गांव में शोभा देवी (60) की खेत में झटका मशीन से मौत हुई थी। नाराज घरवालों ने तब कोतवाली के सामने शव रखकर हंगामा किया था। 26 अगस्त 2025 को जलालपुर के गौरा कमालपुर निवासी आसाराम (50) की भी मौत हुई थी। वह देर रात काम से लौटते समय झटका मशीन की चपेट में आ गए थे।