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Ambedkar Nagar News: कार्य में सफलता के लिए श्रद्धा और ईमानदारी महत्वपूर्ण

Sun, 11 Jan 2026 10:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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.प्रवाचक धर्मराज तिवारी।
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जमुनीपुर (अंबेडकरनगर)। अकबरपुर के तमसा मार्ग स्थित बाबा मैरिज लॉन में रामकथा के सातवें दिन रविवार को राम वन गमन और केवट संवाद प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक धर्मराज तिवारी ने बताया कि राजा दशरथ अपने पुत्र राम के राजतिलक की तैयारियों में व्यस्त थे।
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महल में अचानक घटनाक्रम ने मोड़ लिया जब दासी मंथरा के प्रभाव में महारानी कैकेयी ने अपने पूर्व में दिए गए दो वरदानों का उपयोग करते हुए राम को चौदह वर्षों के वनवास और भरत को अयोध्या का राजा बनाने की मांग की। राम ने पिता की आज्ञा का सर्वोच्च सम्मान करते हुए वनगमन स्वीकार किया। यह प्रसंग अनुशासन, कर्तव्य और आज्ञा का महत्व दर्शाता है। राम, लक्ष्मण व सीता के वनवास चले जाने के बाद राजा दशरथ बेसुध होकर श्रवण के माता-पिता के श्राप को याद कर रहे हैं। राम ने जंगल में गंगा पार करने के लिए केवट को बुलाया। केवट ने बताया कि वह राम के प्रभाव और उनकी विनम्रता को जानता है और उनकी नाव पत्थर से भी कोमल है। कर्तव्य को सर्वोपरि रखना जीवन में अनिवार्य है।
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