शहर के प्रमुख इलाकों के साथ ही जिले के बाजारों में प्रतिदिन घंटों जाम से जूझना राहगीरों की मजबूरी बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों से लेकर जिला मुख्यालय तक रोज घंटों लगने वाले जाम से हर वर्ग के लोग परेशान हैं। मगर जनप्रतिनिधियों से लेकर पुलिस व प्रशासनिक अफसर तक इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिले में जाम का संकट गहराता जा रहा है। जाहिर तौर पर इसमें वाहनों की संख्या बढ़ना एक बड़ा कारण है, लेकिन इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को लेकर की जा रही अनदेखी भी कम जिम्मेदार नहीं है। लगभग तीन वर्ष से जाम की समस्या तेजी से बढ़ी है।
जिला मुख्यालय पर प्रतिदिन सुबह से देर सायं तक जाम ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। छात्र-छात्राओं से लेकर बुजुर्गों व मरीजों को लगभग प्रतिदिन जाम से जूझने को विवश होना पड़ता है। इसके साथ ही व्यापारिक व अन्य कार्यों पर भी प्रतिकूल असर देखा जा रहा है।
जिला मुख्यालय पर बाईपास या रिंगरोड के निर्माण के बगैर जाम से पूरी तरह से छुटकारा मिलना संभव नहीं है। हालांकि इससे पहले यदि टैक्सी वाहनों को शहर के बाहर खड़ा करने का नियम प्रभावी हो जाए और नो इंट्री व्यवस्था में परिवर्तन के साथ ही अस्थायी अतिक्रमण को ही हटवा दिया जाए तो भी तात्कालिक तौर पर जाम से काफी हद तक निजात मिल सकती है।
पहले जाम का संकट जिला मुख्यालय पर ही सीमित था, लेकिन अब कस्बों में भी जाम की समस्या बढ़ गई है। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ तेजी से बढ़ता अतिक्रमण तथा वैकल्पिक मार्गों की बेहतरी को लेकर बरती जाने वाली अनदेखी मुख्य रूप से जिम्मेदार है।
टांडा, बसखारी व जलालपुर में जाम का जो संकट गहराता जा रहा है, वह काफी हद तक दूर हो जाए, यदि वहां वैकल्पिक मार्गों पर अतिक्रमण हटवाने के साथ ही उन्हें दुरुस्त करा दिया जाए। सड़क पटरियों पर अतिक्रमण भी इन कस्बों में जाम का कारण बना हुआ है।
भीटी, रामनगर, हंसवर व जहांगीरगंज में मार्गों की दशा बेहतर कर दी जाए तो वहां भी यातायात की कठिनाई दूर हो सकती है। प्रतिदिन लगने वाले जाम से जनप्रतिनिधि तथा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी भी वाकिफ हैं मगर इसके बाद भी अब तक कोई सार्थक पहल जाम से निजात दिलाने को लेकर सामने नहीं आ सकी है।