फोटो-17, अंबेडकरनगर में कोरोना वायरस को लेकर कलेक्ट्रेट का मुख्य द्वार बंद होने के चलते भटकते नजर आ
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अंबेडकरनगर। कोरोना से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट में सामान्य प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। बुधवार को परिसर के दोनों मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए। पुलिसकर्मियों की पूछताछ के बाद सिर्फ जरूरतमंदों को ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा था। इसके साथ ही कार्यालयों में अधिकारियों से मिलकर प्रार्थना पत्र देने की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले फरियादियों को भी निराश होना पड़ा। प्रशासन ने कहा है कि जो भी फरियादी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही रेलवे व बस स्टेशन समेत सार्वजनिक स्थानों पर आने वाले यात्रियों व नागरिकों की जांच के लिए चिकित्सकों की टीम तैनात कर दी गई है। उधर, कोरोना से बचने के लिए प्रांतीय निर्णय के अनुसार जिले के तीन केंद्रों पर भी यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन दो अप्रैल तक के लिए रोक दिया गया।
कोरोना वायरस से जनसामान्य को बचाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाने शुरु कर दिए हैं। कई दिनों से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के बाद अब जिला प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक निर्णय लेना शुरू किया है। इसी सिलसिले में बुधवार से कलेक्ट्र्ेट में सामान्य प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अक्सर किसी एक फरियादी के साथ तीन चार अन्य व्यक्ति भी कार्यालय पहुंचते रहते हैं। इससे कार्यालयों में भीड़ बढ़ती रहती है। ऐसे माहौल में कोरोना वायरस फैलने की आशंका बढ़ जाती है।
इसी संभावना को कम करने के लिए बुधवार को जिला प्रशासन ने तय किया कि कलेक्ट्रेट में अनावश्यक प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाए। इसी के बाद कलेक्ट्रेट परिसर के टांडा रोड स्थित तथा अंबेडकर प्रतिमा के निकट स्थित प्रवेश द्वार को बंद कर दिया गया। यहां फरियादियों के जाने के लिए छोटा गेट अवश्य खोला गया था, लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मियों की सघन पूछताछ के बाद ही जरूरतमंदों को प्रवेश दिया जा रहा था। अनावश्यक ढंग से पहुंचने वाले नागरिकों को प्रवेश नहीं दिया गया।
कई फरियादियों के प्रार्थना पत्र भी बाहर ही जमा करा लिए गए। कलेक्ट्रेट परिसर में सिर्फ उन्हीं नागरिकों को जाने की अनुमति मिल रही थी, जिन्हें अलग अलग न्यायालयों में मुकदमे की तारीख पर पहुंचना जरूरी था। हालांकि ज्यादातर मामलों में सुनवाई की बजाए अगली तारीख दे दी गई। प्रशासन ने तय किया है कि अगले कुछ दिनों तक फरियादी आमतौर पर अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायत नहीं दर्ज करा सकेंगे। बहुत जरूरी होने पर भी उन्हें कार्यालय आने की जरूरत है।
इस बीच कोरोना वायरस के चलते राज्य स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुरूप जिले के तीनों मूल्यांकन केंद्रों पर बुधवार से यूपी बोर्ड परीक्षा कापियों का मूल्यांकन रोक दिया गया। जानकारी के चलते ज्यादातर शिक्षक तो मूल्यांकन के लिए नहीं पहुंचे, लेकिन जिन शिक्षकों को इसकी जानकारी नहीं थी, उन्हें मूल्यांकन केन्द्रों से वापस लौटना पड़ा। शिक्षकों ने मूल्यांकन कार्य स्थगित किए जाने का स्वागत किया है। डीआईओएस विनोद कुमार सिंह ने बताया कि दो अप्रैल तक मूल्यांकन का कार्य स्थगित किया गया है। इस संदर्भ में आगे जो भी निर्देश आएंगे उसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।