अंबेडकरनगर। महरुआ में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन शनिवार को कथा पंडाल भक्तिभाव और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। प्रवाचक आचार्य कृष्णानंद महाराज ने विभिन्न दिव्य प्रसंगों का मनोहर वर्णन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से सराबोर कर दिया।
प्रवाचक ने अंतिम दिन में भगवान श्रीकृष्ण की विविध लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मां देवकी के आग्रह पर श्रीकृष्ण द्वारा छह पुत्रों को पुनः लाकर उन्हें सौंपने का दिव्य प्रसंग करुणा और मातृ-भक्ति का अनुपम उदाहरण है। इसके साथ ही उन्होंने सुभद्रा-हरण, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष तथा अन्य प्रमुख प्रसंगों का वर्णन किया।
सुदामा चरित्र पर बोलते हुए महाराज ने कहा कि सच्ची मित्रता कैसी होती है, यह भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रसंग से भली-भांति समझा जा सकता है। जब-जब भक्त विपत्ति में पड़ा है, प्रभु सदैव उसके तारण हेतु अवतरित हुए हैं। यही श्रीमद्भागवत का शाश्वत संदेश है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रवींद्र नाथ पांडेय, उमा पांडेय, ओम प्रकाश पांडेय, रुद्र प्रकाश पांडेय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।