उपभोक्ताओं का कहना है कि बीते दिनों में दो अलग अलग चरण में चलाए गए अभियान में पावर कॉर्पोरेशन को बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचा था। पहले उसका लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए था। इसके बाद कोई निर्णय लिया जाता तो फिर इतना दर्द न होता।
विद्युत आपूर्ति का संकट इस गर्मी में भी पूरे चरम पर है। उपभोक्ताओं को उम्मीद थी कि शायद इस बार हालात कुछ बेहतर हो जाएं, लेकिन ऐसा हो नहीं सका है। 220 केवी विद्युत उपकेन्द्र व 132 केवी उपकेन्द्र जलालपुर का शुभारंभ जरूर बीते दिनों हुआ, लेकिन अभी इनका व्यापक लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल सका है।
जर्जर विद्युत तार बदले व ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि किए बगैर उपभोक्ताओं को कोई खास लाभ मिलने वाला नहीं है। नतीजा यह कि आए दिन ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं तो वहीं जर्जर तार लगाकर टूट रहे हैं। ऐसे में शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति खस्ताहाल बनी हुई है।
निर्धारित कटौती के अलावा भी औसतन दो घंटे शहरी क्षेत्र में तो तीन से चार घंटे ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित हो रही है। विद्युत आपूर्ति को लेकर दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बीच त्राहि त्राहि सी मची है। उपभोक्ताओं द्वारा व्यवस्था में लगातार सुधार की मांग की जा रही है, लेकिन इस तरफ समुचित ध्यान देने की सुध शायद किसी को नहीं है।