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पंचायत चुनाव के आरक्षण ने दिया कई दिग्गजों को झटका

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अंबेडकरनगर। ग्राम पंचायत की सरकार के मुखिया बनने के सपनों को मंगलवार देर शाम जारी हुई आरक्षण सूची ने तगड़ा झटका दिया है। कई ग्राम पंचायत के निवर्तमान प्रधान इस बार चुनाव लड़ने से वंचित हो गए हैं, तो वहीं कई चेहरे चुनाव लड़ने का रास्ता साफ होने से खिल उठे हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद मंगलवार देर रात तक गांव की चौपालों में नए समीकरणों की गूंज सुनाई पड़ती रही। देर रात तक इन चौपालों में आरक्षण के अनुरूप प्रधान पद के चुनाव को लेकर जोड़तोड़ होती दिखी। इसमें कहीं खुशी का माहौल दिखा तो कहीं मायूसी भी देखने को मिली। इन सबके बीच लगभग सभी जगह बदली हुई परिस्थितियों के अनुरूप चुनावों की तैयारियां गति पकड़ती दिखीं।
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पिछले कई दिनों से पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण सूची पर सभी की निगाह लगी हुई थी। जिले में कुल 902 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान पद का चुनाव होना है। आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने के बावजूद ज्यादातर जगहां पर संभावित दावेदारों ने शुरुआती तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन वे इन तैयारियों को गति नहीं पकड़ा रहे थे। ऐसे सभी दावेदारों को आरक्षण की स्थिति सामने आने का इंतजार था। इस बीच गत दिवस जब शासन ने यह स्पष्ट किया कि 2 मार्च को आरक्षण की सूची प्रकाशित होगी, तो सभी दावेदारों की निगाह इस तरफ लग गई। मंगलवार को सुबह से ही यह इंतजार शुरू हो गया कि जल्दी से दोपहर हो और आरक्षण की सूची जारी कर दी जाए। दोपहर बीतने के बाद भी जब सूची जारी नहीं हुई, तो दावेदारों की बेचैनी बढ़ने लगी। पता चला कि सूची शाम 5 बजे तक जारी हो जाएगी। इस अवधि का इंतजार करना तमाम दावेदारों के लिए भारी पड़ रहा था।
जैसे तैसे शाम पांच बजा, तो एक बार फिर से दावेदारों की उत्सुकता बढ़ने लगी। हालांकि इस बार भी निराशा ही हाथ आई। अंतत: देर शाम नौ बजे के बाद सूची जारी हुई तो जिले भर में हलचल बढ़ गई। आरक्षण का क्रम घोषित होने से कहीं निराशा तो कहीं खुशी का माहौल देखने को मिला। बदले हुए समीकरणों ने कई बड़े दावेदारों की उम्मीदें चकनाचूर कर दीं।
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कटेहरी प्रधान संघ अध्यक्ष व खड़हरा के निवर्तमान प्रधान रहे रवींद्र कुमार पाण्डेय अब आरक्षण के चलते चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। अयोध्या मंडल की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शामिल प्रतापपुर चमुर्खा की निवर्तमान प्रधान शशि सिंह भी चुनाव लड़ने से वंचित हो गई हैं। दरअसल प्रतापपुर चमुर्खा पिछड़ी वर्ग महिला तो खड़हरा पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। भाजपा के प्रांतीय नेता यमुना प्रसाद चतुर्वेदी की पत्नी निवर्तमान ग्राम प्रधान नीलम चतुर्वेदी या उनके परिवारीजन इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यह पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित किया गया है। जगतूपुर बिलटई से ग्राम प्रधान रहे धर्मेंद्र सिंह अब चुनाव नहीं लड़ पाएंगे क्योंकि यह सीट अब अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो गई है।
वहीं आजनपारा से प्रधान रहे राजमणि यादव के लिए लाल झंडी इसलिए लग गई है, क्योंकि यह सीट अनुसूचित जाति के खाते में चली गई है। पंथीपुर के ग्राम प्रधान रहे अरुण कुमार उपाध्याय तथा अशरफपुर मजगवां से प्रधान रहे विवेक सिंह चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पंथीपुर की सीट अनुसूचित जाति महिला, जबकि अशरफपुर मजगवां की सीट पिछड़ी जाति महिला के लिए आरक्षित हुई है। करौंदी मिश्र से प्रधान रहे सुरेंद्र पाण्डेय तथा तिहायतपुर से चुनाव लडने की तैयारी में जुटे रणविजय व उनके समर्थकों को झटका लगा है। मठिया से प्रधान रहीं कुसुम सिंह पर भी आरक्षण की मार पड़ी है।
लखनडीह ग्राम पंचायत से अब समाजवादी युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष पतिराम यादव के चाचा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यह सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दी गई है। गोविंदापुर से अमर बहादुर सिंह, काही से प्रमोद शुक्ला, बेला से प्रदीप सिंह, बथुआ से उमाशंकर दुबे व परियाएं से अनिल सिंह आरक्षण के चलते चुनावी दौड़ से बाहर हो गए हैं। उधर इन सबके बीच आरक्षण सूची ने तमाम ग्राम पंचायतों में नए दावेदारों को संजीवनी प्रदान कर दी है।
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