कटेहरी (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के घाघूपुर में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को प्रवाचक बालमुकुंद शास्त्री ने भक्ति, सेवा, परिवार और समाज में मानवीय मूल्यों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल सुनने का विषय नहीं, जीवन जीने का मार्ग है। भक्ति का अर्थ विचार, व्यवहार और चरित्र में भगवान को उतार लेना है। आज लोग सफलता की दौड़ में इतना भाग रहे हैं कि घर पहुंचकर भी घर नहीं पहुंचते। परिवार पास है, पर मन हजारों किलोमीटर दूर है। समाज में टूटते रिश्तों का कारण धन की कमी नहीं, संवाद, संवेदना और प्रेम की कमी है। माता-पिता जब बूढ़े होते हैं, तो वे सहारे के लिए संतानों का इंतजार नहीं, उनके समय और प्यार का इंतजार करते हैं। जहां प्रेम है, वहां कटुता की कोई दीवार टिक नहीं पाती। समाज को बदलने के लिए हथियार नहीं, हृदय की शक्ति चाहिए। कठोर हृदय को युद्ध से नहीं, मानवीयता से जीतना होता है। मनुष्य की सबसे बड़ी हार तब होती है, जब वह खुद को भगवान से बड़ा समझने लगता है। जिस घर में ईश्वर का नाम है वहां अहंकार और दुर्भावना प्रवेश नहीं कर सकती। इस दौरान शिव शंकर मिश्रा, गौरी शंकर मिश्रा, लालमणि, नवनीत, मनीष, कन्हैया प्रसाद, उदयभान तिवारी, देवी प्रसाद मिश्रा, जोखन राम यादव व अन्य उपस्थित रहे।