योजना के तहत समयबद्ध ढंग से काम न हो पाना भी लोगों के लिए कठिनाइयां खड़ी कर रहा है। न तो समय से जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र निर्गत हो पा रहे हैं और न ही पेंशन को लेकर किए जाने वाले आवेदनों का समुचित निस्तारण हो पा रहा है।
आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द पहुंचाने तथा योजनाओं को पारदर्शी ढंग से लागू करने के लिए ई गवर्नेंस योजना लागू की गई थी। यह योजना जिले में वर्ष 2012 से लोकवाणी व जनसेवा केंद्रों के माध्यम चलाई जा रही है।
इस योजना का प्रभावी लाभ आम लोगों को मिल नहीं पा रहा है। शुरुआती दौर में तो सिर्फ प्रमाणपत्रों के लिए आनलाइन आवेदन तक की ही सुविधा थी। रिपोर्ट लगाने का काम मैनुअल ही होता था। जनवरी 2015 में ई गवर्नेंस योजना को प्रदेश के 35 जिलों में लागू कर दिया गया।
इससे रिपोर्ट लगाने का काम भी आनलाइन होने लगा। ऐसा इसलिए किया गया ताकि लोगों को और जल्दी सुविधाएं मिल सकें। हालांकि इसके नतीजे ज्यादा सुखद नहीं रहे। कारण यह कि जिले में योजनाओं को लेकर आनलाइन सुविधा का लाभ आम लोग नहीं उठा पा रहे हैं।
जाति, आय व निवास प्रमाणपत्र तो जनसेवा केंद्रों के माध्यम से प्राय: मिल जाते हैं लेकिन जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र प्राप्त करने में अभी भी कठिनाइयां आ रही हैं।
जिला मुख्यालय के निकट स्थित एक केंद्र के संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अन्य प्रमाणपत्र तो समय रहते मिल जाते हैं, लेकिन जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र मिलने में अभी भी विलंब हो रहा है। इस दािशा में और सुधार की जरूरत है।
इसके अलावा आम लोगों के समक्ष एक बड़ी मुश्किल यह कि समाज कल्याण से जुड़े विभिन्न प्रकार की पेंशन में भी लाभार्थियों को आनलाइन सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जलालपुर के वृद्ध जगन्नाथ ने बताया कि उसने पेंशन के लिए आनलाइन आवेदन लगभग चार माह पूर्व किया था लेकिन न तो पेंशन स्वीकृत हुई और न कोई जानकारी दी गई।