मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजनाओं में से एक जल बचाओ अभियान के तहत 11 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में 443 तालाबों का निर्माण तो करा दिया गया लेकिन इन तालाबों में पानी भरने की कोई सुविधा नहीं दी जा सकी।
नतीजा यह है कि बढ़ते तापमान के बीच इन तालाबों में धूल उड़ती नजर आ रही है। तालाब में पानी न होने से एक तरफ जहां जलस्तर गिरने की संभावना बढ़ गई है, वहीं मवेशियों के समक्ष प्यास बुझाने की समस्या भी खड़ी हो गई है।
विशेष बात यह कि गांव के जिन तालाबों में कुछ पानी रहता भी था, उनमें ऐसे तालाबों के निर्माण के बाद से पानी गायब हो गया है। ऐसे में आने वाले समय में ग्रामीणों के समक्ष बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त जलस्तर बना रहे और मवेशियों को पेयजल उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह तालाबों की खुदाई व सौंदर्यीकरण का कार्य कराए जाने का निर्णय लिया गया।
इसके तहत जिले के नौ विकास खंडों में कुल 443 तालाबों के निर्माण के लिए चिह्नित किया गया। तालाब के निर्माण में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए डीआरडीए को 11 करोड़ 24 लाख रुपये भी उपलब्ध करा दिए गए।
अभियान के तहत अकबरपुर विकास खंड में 1 करोड़ 11 लाख 73 हजार रुपये की लागत से 60 तालाब, बसखारी में 51 लाख 7 हजार रुपये की लागत से 18, भीटी में 1 करोड़ 30 लाख 4 हजार की लागत से 43, भियांव में 1 करोड़ 77 लाख 5 हजार की लागत से 48, जहांगीरगंज में 59 लाख 8 हजार की लागत से 62, जलालपुर में 1 करोड़ 41 लाख 53 हजार की लागत से 51, कटेहरी में 1 करोड़ 57 लाख 63 हजार की लागत से 50, रामनगर में 1 करोड़ 39 लाख 76 हजार की लागत से 51 व टांडा विकास खंड में 1 करोड़ 55 लाख 39 हजार की लागत से 60 तालाबों का निर्माण कराए जाने को हरी झंडी मिली।
अकबरपुर विकास खंड में दो तालाबों के निर्माण को छोड़कर अन्य सभी तालाबों का निर्माण बीते दिनों ही पूर्ण कर लिया गया। इनके सबके बाद भी अब तक इन तालाबों में पानी डालने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
नतीजा यह है कि तालाबों में पानी न होने से न सिर्फ संबंधित गांव के ग्रामीणों, बल्कि मवेशियों को पेयजल के लिए विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अकबरपुर विकास खंड के कोडऱा निवासी रामपूजन व सभापती ने कहा कि खुदाई के पहले तालाबों में जून माह तक पानी रहता था, लेकिन योजना के तहत जब से तालाब की खुदाई की गई है, तब से पानी नदारद हो गया है। इससे सबसे अधिक समस्या मवेशियों के समक्ष खड़ी हो रही है।