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धन की कमी से जेल का निर्माण ठप

Tue, 05 Sep 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला/अंबेडकरनगर
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अधूरी पड़ी जेल - फोटो : अमर उजाला
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जिला जेल का निर्माण कार्य धन के अभाव में ठप हो गया है। पांच करोड़ रुपये की मांग कार्यदायी संस्था ने शासन को पत्र भेजकर की है। यह रकम मंजूर हो तो यहां अधर में लटका विद्युतीकरण एक पुलिया का निर्माण तथा फिनिशिंग टच के कार्य पूरे हो सकें। जेल का निर्माण पूरा न होने की वजह से अंबेडकरनगर के कैदियों को फैजाबाद जेल भेजा जाता है। 
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29 सितंबर 1995 को अंबेडकरनगर जनपद का गठन हुआ था। इसके बाद यहां न्यायालय स्थापित हुई तो कारागार के अभाव में यहां के बंदियों को मंडल कारागार फैजाबाद भेजना शुरू किया गया। बाद में बसपा सरकार ने जिला जेल निर्माण की घोषणा की। वर्ष 2010 में जेल निर्माण का कार्य शुरू हुआ।

राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्य शुरू होने के बाद से ही जेल निर्माण कई तरह की धांधली व मनमानी का शिकार होता रहा। लेटलतीफी व अन्य गड़बड़ियों के चलते इसकी शुरुआती लागत लगभग 60 करोड़  थी, जो बढ़ते हुए लगभग एक अरब तक पहुंच गई है। राजकीय निर्माण निगम ने निर्माण का ठेका निजी संस्था साईं कांस्ट्रक्शन को दिया था, लेकिन वह भी काम पूरा नहीं कर पायी। अब निगम स्वयं ही यह काम करा रहा है। हालांकि जेल निर्माण में अब एक बार फिर से धनाभाव का संकट खड़ा हो गया है। 
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जेल परिसर में सामान्य कैदी बैरक के अलावा हाई सिक्योरिटी बैरक, तनहाई बैरक का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। प्रशासनिक भवन का भी कार्य पूरा हो चुका है। मनोरंजन कक्ष, स्कूल व अस्पताल का निर्माण भी कार्यदायी संस्था ने पूर्ण कर लिया है। हालांकि अभी विद्युतीकरण, मुख्य मार्ग के निकट पुलिया निर्माण, भवन की पेंटिंग, कुछ मार्ग निर्माण सहित फिनिशिंग टच का काम होना बाकी है। इसके लिए कार्यदायी संस्था के सामने धनाभाव का संकट खड़ा हो गया है।

नतीजा यह है कि जेल निर्माण का काम लगभग ठप पड़ा है। बीते दिनों जब जिले के दौरे पर नोडल अफसर डॉ. हरिओम आए थे, तो उन्होंने भी जेल का जायजा लिया था। उस समय जेल की पुताई का कार्य कुछ हिस्सों में चल रहा था, वह भी अब ठप पड़ गया है।

अमर उजाला टीम मंगलवार को जेल परिसर का जायजा लेने पहुंची तो वहां कार्यदायी संस्था की मनमानी पसरी नजर आई। संस्था के मुताबिक कार्य लगभग पूरे कर लिए गए हैं, लेकिन वहां कई जगह अभी मार्ग निर्माण, विद्युतीकरण का कार्य होना बाकी है। परिसर में जहां तहां निष्प्रयोज्य सामग्री बिखरी हुई है, तो पूरा परिसर जंगली घासफूस से घिरा है। मुख्य जेल परिसर के अंदर की सड़क कई जगह अभी से ही क्षतिग्रस्त मिली। 

प्रोजेक्ट मैनेजर रामफल ने कहा कि जेल निर्माण में अब तक 94 करोड़ रुपये का काम हो चुका है। लगभग सभी प्रमुख काम पूरे कर लिए गए हैं। छिटपुट काम बाकी है, जिसके लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यह रकम मिल जाए, तब काम आगे बढ़ सके। 
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