गत वर्ष जुलाई माह में 303 मिमी व इससे पहले के वर्ष में इस माह 208 मिमी बारिश हुई थी, वहीं इस बार जुलाई माह में 175.85 मिमी बारिश हो सकी है। इस वर्ष 293.28 मिमी सामान्य वर्षा का आकलन किया गया था। पहले गेहूं की फसल में अतिवृष्टि का खामियाजा भोग चुके किसानों के सामने अब सूखे जैसे हालात उत्पन्न हो गए हैं।
किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो पा रही हैं। पहले गेहूं की फसल के दौरान किसानों को अतिवृष्टि व ओले आदि का सामना करना पड़ा था। शुरुआती दौर में तो एक आम सर्वे के आधार पर किसानों को राहत देने का फैसला किया गया, लेकिन बाद में सरकार ने गाटावार सर्वे का निर्णय लिया।
इस आधार पर जिले में कुल 63 करोड़ रुपए की जरूरत थी, लेकिन शासन से सिर्फ 23 करोड़ रुपए ही स्वीकृत हो सके। नतीजतन एक तिहाई किसानों को ही सरकारी सहायता मिल सकी। किसानों को उम्मीद थी कि यदि धान की फसल बढ़िया हुई तो भी काफी हद तक भरपाई हो पाएगी। लेकिन धान की बेड़न लगाने के बाद से ही कम वर्षा का क्रम शुरू हो गया।
हालांकि कई अलग अलग दिनों में कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश जरूर होती रही, लेकिन एक साथ बारिश का दौर लगातार न चलने से खेतों को पानी का संकट बना रहा। अब अवर्षण के मौजूदा दौर से जिले में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। दरअसल किसानों ने बीच में हुई बारिश तथा वैकल्पिक प्रबंधों के जरिए धान की रोपाई का भी काम लगभग पूरा कर लिया है, लेकिन अब वर्षा का दौर थम जाने से उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी हैं।
असल में जिन किसानों ने रोपाई कर दी है, उनके खेतों को पानी की जरूरत महसूस हो रही है। बारिश न होने से खेतों में दरार पड़ने लगी है। आने वाले एक सप्ताह में बारिश न होने पर अधिकांश क्षेत्रों में फसलों पर भी असर पड़ने लगेगा, जबकि बसखारी, हंसवर, रामनगर, भीटी व मालीपुर जैसे कई क्षेत्रों में फसल पर असर पड़ने भी लगा है। किसानों के बीच मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता व्याप्त हो रही है।