बारिश न होने से जिले के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। करीब एक पखवारे से जिले में बारिश न होने से किसानों की धान फसल सूखने लगी है। मौसम के सख्त रुख के चलते जिन किसानों ने थोड़ी बहुत सिंचाई की भी थी तो इसका उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंच रहा है।
तेज धूप व उमस के चलते फसलों पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है। एक तरफ जहां बारिश न होने से किसान मुश्किल में हैं वहीं दूसरी तरफ माइनर में टेल तक पानी न पहुंचने व खराब पड़े नलकूपों के दुरुस्त न होने से किसान और परेशान हैं।
किसानों का कहना है कि यदि नलकूप व माइनर से सिंचाई की व्यवस्था पटरी पर होती तो शायद किसानों को आर्थिक चपत कम लगती। विभागीय लापरवाही से किसानों को तगड़ा झटका लग रहा है। अवर्षण के बीच फसलों में रोग भी काफी तेजी से फल रहा है।
जिले में अवर्षण की स्थिति जून माह से ही लगातार बनी हुई है, लेकिन बाद के दिनों में हालात सुधरने की उम्मीद लोगों ने लगा रखी थी। उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है जब सितंबर में ज्यादा तेज धूप व उमस का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम के इस तेवर को देख किसानों में हड़कंप है। खेतों में सूख रही धान की फसलों को देख किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। अमियाबाभनपुर के किसान रामनयन ने कहा कि मौसम ने एक बार फिर किसानों को तगड़ी चपत लगाई है। इससे पहले गेहूं की फसल भी प्रकृति की मार से चौपट हुई थी।
कटेहरी के किसान देवराज वर्मा कहते हैं कि पूरी तरह सूखे जैसे हालात हैं। इसमें छोटे व मंझोले किसानों की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक है। कई अन्य किसानों ने मौजूदा हालात को काफी बदतर बताते हुए कहा कि ऐसे में सरकार को आगे आकर कुछ ठोस प्रबंध करना होगा।