अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की सुध जिम्मेदारों को नहीं है। चारों सामान्य वार्ड में लगे आरओ सिस्टम दो वर्ष से खराब पड़े हैं, वहीं सात निजी वार्ड के एसी लंबे समय से खराब हैं। परिसर स्थित ब्लड बैंक के बाहर लगे वॉटर कूलर की टोटी सूख चुकी है। अस्पताल में लगी लिफ्ट भी लंबे समय से जहां खराब पड़ी है। आग बुझाने के लिए रखी गईं एक दर्जन बालू भरी बाल्टी महज पीकदान बनकर रह गईं हैं। इससे मरीजों व तीमारदारों को कई प्रकार की व्यवहारिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी आते ही तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। बावजूद इसके जिला अस्पताल प्रशासन को मरीजों की दिक्कतों को दूर करने की चिंता बिल्कुल नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि चार सामान्य वार्डों में लगे आरओ सिस्टम लगभग दो वर्ष पहले खराब हो गए थे। एक वर्ष पहले उन्हें दुरुस्त कराने के लिए निकाला गया था। अब तक न तो दुरुस्त किए गए और न ही उनके स्थान पर नए आरओ सिस्टम लगाए गए। मरीज व तीमारदारों को साफ पेजयल की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
नतीजा यह है कि मरीजों व तीमारदारों को इमरजेंसी व ओपीडी गेट के बाहर लगे वॉटर कूलर तक की दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं, अस्पताल परिसर में ही ब्लड बैंक स्थापित है। इसके बाहर लगा वॉटर कूलर भी लगभग डेढ़ वर्ष से खराब पड़ा है। गर्मी बढ़ने के साथ मरीजों व तीमारदारों को प्यास बुझाने के लिए साफ व ठंडा पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
लिफ्ट व एसी भी खराब
तीन मंजिला जिला अस्पताल में सात निजी वार्ड हैं। सभी में अलग से एसी लगे हुए हैं, लेकिन ये सभी एक वर्ष से खराब पड़ें है। इन्हें दुरुस्त कराने के प्रति जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। ऐसे में यहां भर्ती होने वाले मरीज व उनके तीमारदारों को निजी वार्ड का कोई भी लाभ नहीं मिल पाता है। गर्मी में कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल में लगी लिफ्ट भी लगभग तीन वर्ष से खराब है। तीन वर्ष पहले इसका ट्रॉयल हुआ था, लेकिन इसके बाद से चली ही नहीं। आग से निपटने को लेकर भी अस्पताल प्रशासन पूरी तरह से लापरवाह बना हुआ है। परिसर में आग बुझाने के लिए एक दर्जन बालू भरी बाल्टियां रखी तो हैं, लेकिन इसका उपयोग महज पीकदान तक सीमित होकर रह गया है।
समस्याओं के प्रति हों गंभीर
जिला अस्पताल में मिले शहजादपुर के तीमारदार राजेश व मीरानपुर की रेखा ने कहा कि यहां पेयजल की सबसे बड़ी समस्या है। वार्ड तीन में उनके मरीज भर्ती हैं। ऐसे में पानी के लिए ओपीडी या फिर इमरजेंसी के बाहर लगे वॉटर कूलर तक दौड़ लगानी पड़ती है। वही एक स्थान होने की वजह से काफी भीड़ रहती है। कटेहरी के तीमारदार अरविंद व बेवाना के सत्यजीत ने कहा कि अस्पताल प्रशासन को गंभीरतापूर्वक समस्याओं का निस्तारण करना चाहिए।
दुरुस्त कराने की प्रक्रिया शुरू
खराब वॉटर कूलर व एसी को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इमरजेंसी व ओपीडी के मुख्य गेट पर वॉटर कूलर काम कर रहा है। अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त कराई जा रही हैं।
- डॉ. ओमप्रकाश सीएमएस