अंबेडकरनगर। जन्मजात हृदय दोष (कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट) सभी प्रकार के जन्म दोषों में सबसे आम माने जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में अप्रैल 2024 से सितंबर तक 66 बच्चों में यह बीमारी मिली है। इनमें से 31 बच्चों का इलाज हुआ और वे ठीक हो गए।
इसको लेकर चिकित्सकों का मानना है कि बच्चा पैदा होने पर लक्षण दिखें और सही समय पर इलाज शुरू हो जाए तो इस बीमारी से नवजात को बचाया जा सकता है। हर जिले में ऐसे बच्चों के निशुल्क इलाज की भी व्यवस्था है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बीमारी से पीड़ित नवजातों का मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ में कराया जाता है।
जन्मजात हृदय रोग एक ऐसी अवस्था है, जिसमें बच्चा अलग-अलग प्रकार की हृदय संबंधी दोषों के साथ पैदा होता है। इनमें कुछ ऐसे होते हैं, जो सामान्य इलाज व नियमित सावधानियां अपनाने से ठीक हो जाते हैं। कई बार कुछ जन्मजात हृदय रोग काफी घातक भी हो सकते हैं। इस अवस्था में कई पीड़ित की सर्जरी करवाने, आजीवन उपचार व दवा खाने की जरूरत पड़ सकती है। गंभीर अवस्था में कई बार पीड़ित की जान जाने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अविनाश रस्तोगी ने बताया कि नवजात से लेकर थोड़े बड़े बच्चों में ज्यादातर जन्मजात हृदय रोगों के लक्षण प्रत्यक्ष रूप में नजर आने लगते हैं। हालांकि कभी-कभी कुछ अवस्थाओं में ऐसा भी हो सकता है कि समस्या के ज्यादा बढ़ने तक लक्षण नजर न आए या बहुत कम नजर आएं। बच्चा दूध छोड़-छोड़कर पीये, पीते समय माथे पर पसीना हो, त्वचा, होंठ व नाखून का रंग बदलकर हल्का भूरा या नीला हो जाना, तेजी से सांस लेना, वजन न बढ़ना, हाथ-पैर-पेट या आंखों के आसपास की त्वचा में सूजन होना, बार-बार सर्दी जुकाम व निमोनिया होना आदि जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि अमूमन बच्चा पैदा होने पर दो महीने बाद ही लक्षण दिखने लगते हैं। शुरुआती दौर में इसका इलाज किया जाए तो बच्चा पूर्णरूप से स्वस्थ हो सकता है। इसको नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।
मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ में होता है निशुल्क इलाज
जिले में कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट (सीएचडी) से पीड़ित बच्चों के लिए इलाज की निशुल्क व्यवस्था है। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान इस बीमारी के लक्षण मिलते ही चिकित्सक राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के समन्वय को अवगत करा देते हैं। इसके बाद इन बच्चों के माता-पिता की सहमति पर मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ में इलाज कराया जाता है। वर्ष 2024 में एक अप्रैल से 20 सितंबर के बीच 66 बच्चे चिह्नित किए गए हैं। इनमें 31 बच्चे ठीक हो चुके हैं। बाकी 35 बच्चों का इलाज चल रहा है। -
डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी