काफी देर तक
चले हंगामे के बाद लगभग साढ़े 12 बजे चिकित्सक अपने कक्षों में पहुंच सके।
अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सभी शांत हुए। सबसे अधिक समस्या महिला
मरीजों को हुई। दरअसल जिला अस्पताल में तैनात चारों चिकित्सक इस समय में
अवकाश पर चल रही हैं।
जिला अस्पताल में मरीजों व उनके तीमारदारों को
समुचित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर विभागीय अधिकारी तनिक भी
गंभीर नहीं हैं।
मरीजों की सुविधाओं को लेकर शासन प्रशासन से लेकर
जनप्रतिनिधि कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि
अस्पताल में तैनात चार महिला चिकित्सक डा. रंजनी सचान, डा. सुषमा गुप्ता,
डा. भानुमती व डा. रोली द्विवेदी इस समय अवकाश पर चल रही हैं।
ऐसे में
महिला मरीजों को भी इलाज के लिए इधर से उधर भटकना पड़ रहा है। इसके अलावा
जो पुरुष चिकित्सक हैं, वह भी अपनी जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह लापरवाह
बने हुए हैं। कभी भी समय से नहीं आते। शनिवार को साढ़े 11 बजे तक ओपीडी
में कोई भी चिकित्सक नहीं पहुंच सका था।
डा. डीपी वर्मा पौने 12 बजे तक
अपने कक्ष में नहीं पहुंच सके थे, तो नाक, कान व गला के चिकित्सक डा.
मुख्तार शेख भी 12 बजे तक मरीजों को देखने के लिए नहीं पहुंच सके थे। इसके
अलावा अन्य चिकित्सकों के कक्ष की कुर्सी खाली पड़ी थी। इन चिकित्सकों को
दिखाने के लिए बड़ी संख्या में मरीज व उनके तीमारदार कक्ष के सामने एकत्र
थे।
भीषण गर्मी में आखिरकार मरीजों व उनके तीमारदारों का धैर्य जवाब
दे गया। एकजुट हुए मरीज व तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। अस्पताल
प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए दोषी चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई
की मांग करने लगे।
लगभग आधे घंटे तक चले हंगामे के बाद लगभग साढ़े 12 बजे
चिकित्सक अपने अपने कक्ष में पहुंचे इसके बाद हंगामा समाप्त हो सका। सीएमएस
ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि कुछ चिकित्सक अवकाश पर हैं, जबकि कुछ चिकित्सक
उस समय राउंड पर थे।