अंबेडकरनगर। आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र पांती के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष. डॉ. रामजीत ने किसानों को आम के बौरों की बेहतर देखरेख की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आम के उत्पादन के लिए यह सबसे अच्छा समय है। इसी समय बागों की देखरेख करने की जरूरत है। दवाओं का छिड़काव व देखरेख करें तो आम का बेहतर उत्पादन किया जा सकता है। आम के बागों का प्रबंधन इस समय बहुत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस समय आम में खर्रा व चूर्णिल आसिता रोग के प्रकोप की संभावना रहती है। इस कारण आम के पुष्पवृंत सफेद चूर्ण से ढक जाते हैं तथा मंजरियां एवं छोटे फल सूख कर गिर जाते है। इसके प्रारंभिक लक्षण दिखाई देते ही दो ग्राम सल्फर प्रति लीटर पानी या हेक्साकोनोजोल दवा की एक मिली. मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। प्रकोप होने पर ट्राई फ्लोक्सीस्ट्रोबिन 25 प्रतिशत एवं टैबूकोनाजोल 50 प्रतिशत का 0.75 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।
बौर आने पर ही भुनगा कीट के प्रकोप की संभावना रहती है। नियंत्रण की लिए डाईमेथोएट की एक मिली. या इमिडाक्लोप्रिड की 0.5 मिली. मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें। यदि पेड़ पर थ्रिप्स कीट का प्रकोप हो रहा है, तो उपरोक्त दवा या थायोमेथोकसेम कीटनाशक का छिड़काव करें। जब बौर में फूल खिल रहे हों तो किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करें। इस समय मधुमक्खी द्वारा परागण होता है। कीटनाशक डालने से परागण क्रिया प्रभावित होगी और उत्पादन कम होगा। जब फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब सिंचाई करें।