मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने से जिला अस्पताल की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। अस्पताल के सभी वार्ड व इमरजेंसी के बेड मरीजों से भर गए हैं। स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों के लिए मंगलवार को बरामद में बेड लगवाकर उनका उपचार शुरू किया गया। इससे मरीजों के साथ उनके तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
जिला अस्पताल में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही अव्यवस्थाएं भी सामने आने लगी हैं। अस्पताल की क्षमता में वृद्धि न किए जाने के चलते मरीजों को यहां बेड मिल पाना कठिन हो गया है। इमरजेंसी से लेकर जनरल वार्ड तक मारामारी का माहौल है। पहले से ही कई तरह की मुश्किलों से जूझ रहे मरीज व उनके तीमारदारों की मुश्किलें जिला अस्पताल के हालात बढ़ा दे रहे।
यहां इलाज से ज्यादा बड़ी समस्या भर्ती होने को लेकर है। जिला अस्पताल में चार सामान्य वार्ड व इमरजेंसी के तीन वार्ड हैं। इन वार्डों में 170 बेड हैं। आम दिनों में तो सामान्य वार्ड के बेड नहीं भरते लेकिन बरसात के दिनों में मरीजों की संख्या काफी बढ़ जाती है।
मौसम में परिवर्तन के चलते इस समय संक्रामक रोग तेजी से पांव पसार रहे हैं। वायरल बुखार, मलेरिया, टायफाइड, पेट दर्द जैसे रोग से पीड़ित व्यक्ति जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे वार्डों के बेड मरीजों से भर गए हैं। मंगलवार को गंभीर से बीमार लोगों को भर्ती करने की समस्या खड़ी हो गई।
ऐसे में अस्पताल के बरामद में बेड रखकर मरीजों का इलाज किया गया। ऐसे मरीजों व उनके तीमारदारों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वार्डों में भर्ती मरीजों को भी गर्मी से परेशानी का सामान करना पड़ रहा क्योंकि वहां लगे पंखे सही काम नहीं कर रहे हैं।
तीमारदार शैलेश के मुताबिक मरीज को मजबूरन बरामदे में भर्ती कराना पड़ रहा है। एक अन्य तीमारदार रवींद्र का कहना था कि दिन में लोगों की ज्यादा आवाजाही से बरामद में भर्ती मरीजों को परेशानी हो रही है।