अंबेडकरनगर। बीमारी, जांच और उपचार...इन सब में सबसे अहम कड़ी जांच ही मानी जाती है। बिना इसके अंदाजिया दवा सेहत को और भी बिगाड़ सकती है। लेकिन जिला अस्पताल में हाल जुदा है। महिलाओं के लिए प्रमुख थायराॅइड जांच की सुविधा ही नहीं है। इस कारण उन्हें बाहर 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, मातृ-शिशु विंग में किडनी व लीवर जांच की सुविधा भी नहीं है। एक्सरे के लिए भी भटकना पड़ रहा है।
पांच वर्ष का इंतजार
जिला अस्पताल में शुरुआती दो वर्षों में निजी संस्था को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तब थायरॉइड की भी जांच होती थी। लेकिन संस्था का अनुबंध समाप्त होने के बाद पिछले पांच वर्ष से जांच ठप है।
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- अल्ट्रासाउंड की वेटिंग
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंउ के लिए भी सिर्फ एक ही मशीन है। इमरजेंसी को छोड़कर सामान्य मरीजों को 15 से 20 दिन की वेटिंग मिल रही है। मजबूरी में उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ रही है। इसी व्यवस्था के कारण जिला अस्पताल के आसपास निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर फल-फूल रहे हैं।
हेल्थ एटीएम ठप
एक्सरे व सीटी स्कैन के लिए भी यहां मरीजों के लिए मुश्किल कम नहीं हैं। इनके लिए भी मारामारी की स्थिति रहती है। त्वरित परीक्षण रिपोर्ट के लिए जिला अस्पताल में लगा हेल्थ एटीएम भी एक माह से चार्जिंग केबल जलने के कारण ठप है।
धूल फांक रही अल्ट्रासाउंड मशीन
मातृ-शिशु विंग के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन करीब दो वर्ष से जिला अस्पताल में धूल फांक रही है। अस्पतालकर्मियों के मुताबिक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण मशीन का संचालन नहीं हो पा रहा। ऐसे में मातृ-शिशु विंग के मरीज भी जिला अस्पताल में परीक्षण के लिए पहुंच रहे हैं।
बुरा हाल
एक सप्ताह बाद होगा अल्ट्रासाउंड
जिला अस्पताल में सोमवार को पहुंची मंशापुर करौना निवासी ऊषा देवी ने बताया कि पेट में काफी दिनों से दर्द हो रहा है। चिकित्सक को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड का सुझाव दिया। पर्चा लेकर अल्ट्रासाउंड कक्ष में गई तो काफी मिन्नत पर छह फरवरी की तारीख मिली। सोचा था कि तुरंत अल्ट्रासाउंड हो जाएगा तो इलाज में सहूलियत होगी। लेकिन यहां का तो बुरा हाल है।
अस्पताल में थायरॉइड जैसी जांच की सुविधा न होना गलत है। थायरॉइड के मरीज बड़ी संख्या में हैं। ऐसे में जिला अस्पताल में यह सुविधा जरूरी है।
अनुराग त्रिपाठी, अधिवक्ता
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जिला अस्पताल में मरीजों को बेहतर जांच की सुविधा मिले इसके लिए संसाधनों में वृद्धि जरूरी है। इस ओर जिला प्रशासन को भी गंभीर होना होगा।
रवि सिंह, अधिवक्ता
वर्जन अस्पताल में जांच की सुविधा बेहतर करने के लिए बीते दिनों पत्राचार किया गया था। यहां दो वर्ष से विधिवत पैथालॉजी काम कर रही है। पैथालॉजिस्ट की भी तैनाती हो गई है। उम्मीद है कि थायरॉइड जैसी जांच सुविधा भी मिलने लगेगी। मातृ-शिशु विंग में रेडियालॉजिस्ट के लिए जिला प्रशासन के माध्यम से फिर से पत्र भिजवाया जाएगा।
डॉ ओमप्रकाश, सीएमएस जिला अस्पताल