जलालपुर। क्षेत्र के एकडंगा सेमरा में श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शनिवार को प्रवाचक आचार्य रामजस मिश्रा ने बताया कि केवल आस्था नहीं, बल्कि कर्म में ईमानदारी भी आवश्यक है।
समाज में एकता और सहभागिता से सकारात्मक वातावरण बनता है। वास्तविक प्रगति मन और विचारों की शुद्धता से होती है। यह ग्रंथ केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने सृष्टि की उत्पत्ति, ईश्वर भक्ति और मानव जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। बताया कि केवल पूजा-पाठ पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहार और कर्म में भी शुद्धता आवश्यक है। मनुष्य को अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करना चाहिए। आधुनिक जीवन की भाग दौड़ में नैतिक मूल्यों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। संवाद