शहर के तमसा तट प्रागंण में श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर शनिवार को हवन-यज्ञ करते श्रद्धालु
अंबेडकरनगर। शहर के तमसा तट प्रांगण में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का हवन-यज्ञ के साथ शनिवार को विधिवत समापन हो गया। साध्वी भाग्यश्री भारती ने इसके आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हवन केवल धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वातावरण की शुद्धि और मानसिक संतुलन का माध्यम भी है।
यज्ञ में आहुति देने का अर्थ केवल सामग्री समर्पित करना नहीं, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागना भी है। कथा का उद्देश्य केवल कथा श्रवण तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन में उसके संदेशों को अपनाना जरूरी है। कथा के माध्यम से समाज को नैतिकता, कर्तव्य और संयम का संदेश मिलता है। आध्यात्मिक गतिविधियां मन को स्थिर और संतुलित बनाती हैं। जीवन में अनुशासन और नैतिकता सफलता की आधारशिला हैं। हवन-यज्ञ में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ आहुतियां अर्पित कीं। आयोजन स्थल पर अनुशासित तरीके से श्रद्धालु अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। यज्ञ स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लोगों ने एक-एक कर आहुति दी और अपने जीवन में सकारात्मकता लाने का संकल्प लिया।