कोई एक साल तो कोई तीन साल से लगा रहा दौड़, नहीं हो पा रही सुनवाई
तहसील दिवस में राजस्व मामलों की भरमार, समाधान की जगह मिल रहा केवल आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। जलालपुर के बंदीपुर गांव के रहने वाले रामचंद्र दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। बताया कि उनकी पैतृक भूमि पर विपक्षियों ने जबरन कब्जा कर लिया है। उनकी पत्नी भी दिव्यांग हैं। अब तक 20 बार शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। हलांकि इस बार मौके पर मौजूद तहसीलदार गरिमा भार्गव ने लेखपाल और कानूनगो की टीम बनाकर जांच कर निस्तारण के निर्देश दिए।
जिले की सभी तहसीलों में सोमवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन हुआ, लेकिन फरियादियों को समाधान की जगह फिर से केवल आश्वासन लेकर लौटना पड़ा। मामलों के निस्तारण के लिए किसी को एक साल से दौड़ना पड़ रहा है, तो कोई तीन साल से तहसील के चक्कर काट रहा है। राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक रहीं, लेकिन निस्तारण की दर बेहद कम रही। वहीं अकबरपुर तहसील परिसर में समाधान दिवस के दौरान भारी भीड़ उमड़ी, जहां सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला और एसडीएम प्रतीक्षा सिंह ने लोगों की समस्याएं सुनीं।
केस 1:
तीन साल से खतौनी में नाम दर्ज नहीं
स्थान: कजरीनंदापुर
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लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उनकी खतौनी में पूर्व में नाम दर्ज था, लेकिन लेखपाल ने नाम हटा दिया गया। तीन वर्षों से वह नाम पुनः दर्ज कराने के लिए तहसील का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इस गलती के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
केस 2:
आदेश को हुआ एक साल, अब तक अमल नहीं
स्थान: समेसाखान, अकबरपुर
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रमेशचंद्र ने बताया कि विपक्षियों से भूमि विवाद में एक साल पहले पत्थरनसब का आदेश हो चुका है, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हो सका। वह एक वर्ष से लगातार तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण आदेश जमीन पर उतर नहीं पा रहा।