अंबेडकरनगर। मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी जैसे डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक उपयोग बच्चों और युवाओं की आंखों पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से आंखों की रोशनी कमजोर होने के साथ ही अन्य जटिल समस्याएं सामने आ रही हैं। जिला अस्पताल की नेत्र विभाग ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 मरीज आंखों से संबंधित समस्याओं के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों और किशोरों की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे जलन, खुजली, सूखापन और रोशनी सहन न होना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसके अतिरिक्त यह बच्चों के मानसिक विकास और बौद्धिक क्षमताओं पर भी नकारात्मक असर डालता है। जिला अस्पताल में कार्यरत नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सरिता गुप्ता ने बताया कि ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज बच्चों और युवाओं के होते हैं। इनमें से कई सिरदर्द, आंखों में थकान, जलन, नींद न आना और पलकें झपकाने में कमी जैसी शिकायतें लेकर आते हैं। उन्होंने बताया कि स्क्रीन के उपयोग के दौरान लोग पलकें झपकाना कम कर देते हैं, जिससे आंखों में सूखापन बढ़ जाता है। आंखों में चुभन, पानी आना, खुजली और रोशनी से असहजता जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
बचाव है सबसे जरूरी उपाय
डॉ. सरिता ने सलाह दी कि बच्चों को मोबाइल और अन्य स्क्रीन से यथासंभव दूर रखें। उन्हें अधिक समय तक बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें। पढ़ाई प्राकृतिक रोशनी में कराएं। टीवी और मोबाइल का इस्तेमाल सीमित करें। स्क्रीन को बहुत पास से न देखें। हर 20 मिनट पर 20 सेकेंड के लिए स्क्रीन से नजर हटाकर दूर देखें।