मेडल के साथ खड़ी तैयारी की नेशनल खिलाड़ी धनन्या।
अंबेडकरनगर। जिले की बेटी धनन्या तैराकी में राष्ट्रीय स्तर पर मुकाम पा चुकी हैं। वर्ष 2021 से 2025 तक नेशनल तैराकी टीम में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी धनन्या की सफलता की कहानी प्रेरणादायक है। बसखारी के टड़वा गंजन निवासी सुनील की बेटी धनन्या को तैराकी में आगे बढ़ाने की चाहत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है।
g पिता के डर से शुरू हुआ सफर : पिता सुनील के बड़े भाई की पानी में डूबने से हुई दुखद मौत ने उन्हें अपनी बेटी को तैराकी सिखाने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2015 में राजकीय एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में तरणताल की शुरुआत के बाद धनन्या ने अप्रैल 2016 से तैराकी का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। उनकी लगन और पिता के प्रोत्साहन ने उन्हें कभी पीछे मुड़कर देखने नहीं दिया। वर्ष 2017 में, वे बेंगलुरु चले गए, जहां उन्होंने भारतीय टीम के तैराकी प्रशिक्षक जयराज के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
g नेशनल टीम तक का सफर : साल 2019 में धनन्या जूनियर नेशनल टीम का हिस्सा बनीं। दो साल के कठिन प्रशिक्षण के बाद, 2021 में उनका चयन नेशनल टीम में हुआ। तब से लगातार पांच साल से वे नेशनल टीम की ओर से तैराकी प्रतियोगिताओं में भाग ले रही हैं।
वर्ष 2025 में नेशनल टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने आठवां स्थान हासिल किया, जो जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश तैराकी संघ के संयुक्त सचिव मृत्युंजय सिंह के अनुसार, धनन्या जनपद की पहली महिला तैराक खिलाड़ी हैं जिन्होंने कम समय में नेशनल टीम में जगह बनाई। उनकी मां रीता और पिता सुनील बेंगलुरु में हॉस्टल का संचालन करते हैं।