भीटी (अंबेडकरनगर)। भीटी कस्बा स्थित तहसील गेट पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को प्रवाचक पं. राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने समुद्र मंथन, भगवान के चौबीस अवतार, भक्त प्रह्लाद की भक्ति और नरसिंह अवतार प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मानव का हृदय ही संसार रूपी सागर है, जिसमें शुभ-अशुभ विचारों का निरंतर मंथन होता रहता है। जैसे समुद्र मंथन में अमृत और विष दोनों प्रकट हुए, वैसे ही मनुष्य के भीतर भी सद्गुण और दुष्कर्मों की प्रवृत्तियां उठती-गिरती रहती हैं। जो व्यक्ति विवेक का मार्ग चुनता है, वही जीवन में अमृत प्राप्त करता है। जब अत्याचारी हिरण्यकश्यप ने अपने ही पुत्र प्रह्लाद को भस्म करने का आदेश दिया, चारों ओर जल्लाद खड़े थे और अग्निकुंड धधक रहा था।तब भी प्रह्लाद की जिह्वा पर केवल भगवान का ही नाम था। इसी अटल विश्वास ने आग को भी शीतल कर दिया और ईश्वर ने नरसिंह अवतार धारण कर भक्त की रक्षा की।उन्होंने कहा कि भक्ति में ही वह शक्ति है, जो असंभव को भी संभव कर देती है। मृत्यु निश्चित है, किंतु मनुष्य उसे स्वीकार नहीं करता। जो व्यक्ति निष्काम भाव से परमात्मा का स्मरण करता है, वह अपने जन्म और मरण दोनों को सफल बना लेता है।