परिक्रमार्थियों को किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए पुलिस व प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए। जिला मुख्यालय से होकर पूरे दिन चलती रही यह परिक्रमा देर वापस श्रवणक्षेत्र पहुंचकर समाप्त हुई।
जिले मे देवोत्थानी एकादशी पर्व पर सप्तकोसी परिक्रमा श्रवणक्षेत्र से प्रारंभ होती है। इस बार भी परिक्रमा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। रविवार सुबह से ही परिक्रमार्थियों का आने के सिलसिला शुरू हुआ जो देर शाम तक परिक्रमा मार्ग पर हजारों श्रद्धालु आ गए।
परिक्रमा में भाग लेने के लिए शनिवार शाम से ही श्रद्धालु पवित्र श्रवणक्षेत्र धाम पहुंचने लगए। भोर में मड़हा व बिसुही नदी के संगम पर स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने परिक्रमा शुरू की। यह श्रद्धालु श्रवणक्षेत्र से चलकर पवित्र शिवबाबा, अकबरपुर, शहजादपुर, पहितीपुर मार्ग से परिक्रमा करते हुए पुन: श्रवणक्षेत्र पहुंचे।
परिक्रमा में पुरुष व महिलाओं के सात बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल रहे। परिक्रमा कर रहे 65 वर्षीय जगदंबा व उनके साथ मौजूद 68 वर्षीय महादेव ने बताया कि उन्हें याद नहीं है कि कब उन्होंने यह परिक्रमा नहीं की। बताया कि बीते दिनों वे बुखार से पीड़ित थे।
उन्हें लग रहा था कि वे इस बार परिक्रमा नहीं कर सकेंगे, लेकिन भगवान विष्णु की दया थी कि न सिर्फ उनकी तबियत ठीक हो गई, बल्कि उनमें परिक्रमा करने की ताकत भी आ गई। वृद्ध महिला शकुंतला व इंद्रावती ने कहा कि वे प्रत्येक वर्ष परिक्रमा में भाग लेती हैं।
कहा कि जब तक उनके शरीर में ताकत रहेगी, तब तक वह परिक्रमा करती रहेंगी। उनके साथ मौजूद आठ वर्षीय सचिन व नौ वर्षीय रेखा ने कहा कि वे पहली बार परिक्रमा कर रहे हैं। नंगे पैर चलने में थोड़ी कठिनाई हो रही है, लेकिन भगवान की दया से उन्हें कोई बड़ी समस्या नहीं है।