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20 दिन से 902 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप

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अंबेडकरनगर। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के 20 दिन बाद भी 902 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य लगभग ठप पड़े हैं। कुछ जगहों पर मनरेगा के कार्य जरूर चल रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि अभी तक सभी ब्लॉकों के प्रशासकों के डोंगल संचालित नहीं हो सके हैं। हालांकि इससे उलट जिला पंचायत राज विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी ब्लॉकों के डोंगल सक्रिय कर दिए गए हैं। ऐसे में कौन सच बोल रहा और कौन झूठ, यह एक बड़ा सवाल बन गया है। इन सबके बीच डोंगल सक्रिय न होने से लगभग 22 करोड़ रुपये का भुगतान अधर में लटक गया है।
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शासन ने बीती 25 दिसंबर को जिले की सभी 922 ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को खत्म करने की घोषणा कर दी। साथ ही ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार पर रोक लगाते हुए उनके डोंगल को निष्क्रिय कर दिया गया। इसके साथ ही शासन के निर्देश पर विकास खंडों के एडीओ पंचायत को ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। शासन की मंशा थी कि ऐसा करने से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। परंतु अधिकारियों की उदासीनता से जिले कीअधिकांश ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़ने के साथ ही बकाया भुगतान बढ़ गया है।
इससे एक तरफ जहां ग्राम पंचायतों को विभिन्न सामानों को मुहैया कराने वाली संस्थाओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं मनरेगा मजदूरों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। कई ग्राम पंचायतों के मनरेगा मजदूरों का कहना है कि उन्हें पिछले काफी दिनों से भुगतान नहीं मिला था। ऐसे में अब भुगतान में विलंब होने से दिक्कतें बढ़ रही हैं।
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पंचायत प्रशासकों को डोंगल न चालू होने से बनकर तैयार हो चुके पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय के भुगतान में कठिनाई खड़ी हो रही है। नाम न छापने की शर्त पर प्रशासक बने एक एडीओ पंचायत ने बताया कि सभी विकास खंडों में करीब दो से तीन करोड़ रुपये का भुगतान डोंगल न चालू होने से रुका है। सभी विकास खंडों का करीब 22 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया चल रहा है। जिले में 446 पंचायत भवन का निर्माण चल रहा है। इसमें से 120 पंचायत भवन बनकर पूर्ण हुए हैं। शेष पर कार्य चल रहा है।
22 लाख 53 हजार की लागत से बनने वाले इस पंचायत भवन के लिए अधिकांश ग्राम पंचायतों को अभी 10 लाख रुपये से कम का ही धन मिला था। हालांकि कार्यदायी संस्थाओं ने निर्माण पर इससे अधिक धन खर्च कर दिया है। ऐसे में अब भुगतान न होने से कई जगह बीच में कम ठप कर दिया गया है। कुछ ऐसा ही हाल विभिन्न ग्राम पंचायतों में बन रहे सामुदायिक शौचालयों का भी है।
धनाभाव के चलते कार्यदायी संस्थाओं ने निर्माण से हाथ खड़ा कर दिया है। स्थिति यह है कि लगभग सभी ब्लॉकों में डोंगल संचालित न हो पाने से भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से ही नए कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। प्रशासक बने एडीओ पंचायत डोंगल सक्रिय न होने से परेेेशान हैं तो वहीं जिला पंचायत राज कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों का कहना है कि सभी डोंगल सक्रिय कर दिए गए हैं। भुगतान आदि को लेकर कोई कठिनाई नहीं है।
20 ग्राम पंचायतों में नहीं तैनात हैं प्रशासक
बीते दिनों आलापुर तहसील क्षेत्र के जहांगीरगंज व राजेसुल्तानपुर बाजार को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया है। इसके चलते जहांगीरगंज विकास खंड क्षेत्र की 18 व रामनगर विकास खंड की दो ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया। इन ग्राम पंचायतों को दोनों नगर पंचायतों में शामिल किया गया है। इसके चलते ही ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद यहां पर प्रशासक की तैनाती नहीं की गई।
शुरू कर दिए गए हैं डोंगल
प्रशासकों का डोंगल चालू कर दिया गया है। पहले दिक्कत आई थी, लेकिन अब सभी का डोंगल सक्रिय है। डीएम के निर्देशों से सभी प्रशासकों को अवगत करा दिया गया है, जिसमें पंचायत भवन व सामुदायिक शौचालय निर्माण व उसके भुगतान को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं।
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- शेषदेव पांडेय, डीपीआरओ
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