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इंजीनियरिंग कालेज से कांशीराम का नाम हटा

Sat, 10 Oct 2015 11:19 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
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अंबेडकरनगर के नाम से जाना जाएगा। बहुजन समाज पार्टी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। कहा कि विकास तय करने की बजाए नाम बदलने को लेकर जो रवैया दिखाया है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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मालूम हो कि वर्ष 2010 में तत्कालीन बसपा सरकार ने जिले को एक इंजीनियरिंग कॉलेज का तोहफा दिया था। यह भी उल्लेखनीय है कि जिले का गठन भी बसपा सरकार ने ही 29 सितंबर 1995 को किया था।

जनपद गठन के बाद से बसपा सरकार ने ही जिले को मेडिकल कॉलेज, ओवरब्रिज, कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज, राजकीय पालीटेक्निक कॉलेज, खेल स्टेडियम, राजकीय महिला डिग्री कॉलेज, वीवीआईपी गेस्ट हाउस, राजकीय पार्क समेत कई अन्य परियोजनाएं प्रमुखता से दी थीं।
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कृषि इंजीनियरिंग कालेज के अलावा 2010 में जो कॉलेज आफ इंफारमेशन टेक्नोलॉजी की सौगात बसपा सरकार ने दी थी, उसके साथ मान्यवर कांशीराम का नाम जोड़ा था। वर्ष 2010 व 11 में इस इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों की पढ़ाई केएनआई सुल्तानपुर में हुई, लेकिन वर्ष 2012 से यहां निर्माणाधीन परिसर में ही पढ़ाई होने लगी।

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस महाविद्यालय की कुल लागत 62 करोड़ रुपये है। अभी महाविद्यालय का संपूर्ण निर्माण पूरा नहीं हुआ है। लगभग 800 छात्र छात्राएं यहां अध्यनरत हैं।

मान्यवर कांशीराम कालेज आफ इंफारमेशन टेक्नोलॉजी के नाम से यह विद्यालय न सिर्फ जिले के विभिन्न क्षेत्रों, वरन प्रदेश के कई क्षेत्रों में भी पहचान बना चुका था, लेकिन इसी बीच शासन ने इसका नाम बदलने का फैसला कर लिया। गत दिनों प्राविधिक शिक्षा विभाग से आए पत्र के माध्यम से महाविद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी मिली।

इस बीच नाम बदले जाने को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने कड़ी नाराजगी जताई है। पूर्व सांसद त्रिभुवनदत्त ने कहा कि यह घटिया स्तर की मानसिकता का एक और परिचायक है। जिले में विकास तय करने की बजाए महापुरुषों के नाम के अपमान से कुछ मिलने वाला नहीं है।

जनता इसका भी फैसला करेगी। पूर्व सांसद राकेश पाण्डेय ने जोर देकर कहा कि यह मामला जनता की अदालत में ले जाया जाएगा। उधर महाविद्यालय प्रचार्य केएस वर्मा ने कहा है कि महाविद्यालय का नाम अब राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबेडकरनगर हो गया है।
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