अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित करीब 200 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं, जिनके भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। इन विद्यालयों में पढ़ रहे करीब 22 हजार छात्र-छात्राओं की जान हमेशा जोखिम में बनी रहती है। कहीं छत तो कहीं दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। हल्की बरसात होने पर ही शिक्षण कक्ष जलाशय में तब्दील हो जाते हैं। इससे छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वहीं, स्कूलों में तैनात स्टाफ को भी हमेशा डर सताता रहता है। जर्जर हो चुके विद्यालयों की मरम्मत कराने की सुध जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं है। शायद उन्हें किसी अप्रिय घटना का इंतजार है।
परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए शासन न विभिन्न प्रकार की योजनाएं तो शुरू कर दीं, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। तमाम ऐसे विद्यालय संचालित हैं, जिनके भवन काफी जर्जर हो चुके हैं। इससे संबंधित विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं की जान हमेशा जोखिम में रहती है। बताते चलें कि जिले में 1873 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1353 प्राथमिक व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।
इनके सापेक्ष 200 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं, जिनके भवन अत्यंत जर्जर हो चुके हैं। किसी की छत में दरार है तो किसी की दीवार। भीटी शिक्षा क्षेत्र के रानीपुर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षण कक्ष की छत क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में जर्जर बरामदे में शिक्षण कार्य चल रहा है। प्राथमिक विद्यालय जैनापुर, प्राथमिक विद्यालय भसमा, प्राथमिक विद्यालय रामपुर चाड़ीडीहा, प्राथमिक विद्यालय चितई पट्टी, प्राथमिक विद्यालय मथुरापुर समेत तमाम ऐसे विद्यालय हैं, जहां के भवन बरसात के दिनों में टपकते रहते हैं। इससे संबंधित विद्यालयों में पढ़ रहे 22 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की जान जोखिम में बनी हुई है।
जर्जर छत प्राथमिक विद्यालय भिटौरा की पहचान बन चुकी है। छत इतनी खराब है कि न सिर्फ जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं, बल्कि प्लास्टर भी अक्सर टूटकर गिरता है। हल्की बरसात में ही छत टपकने लगती है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। विद्यालय में 104 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिन्हें बरसात के दिनों में विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। प्लास्टर टूटकर गिरने से अक्सर असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। प्रधानाध्यापक मिथिलेश राना ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र भेजा गया।
जलालपुर तहसील क्षेत्र के वाजिदपुर हाजीपुर िसित प्राथमिक विद्यालय का भवन लंबे समय से जर्जर है। लगभग चार वर्ष पूर्व आए भूकंप के चलते कक्षों की छतों व दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। अक्सर छत व दीवार का प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है। बरसात के दिनों में छत टपकती है, जिससे कक्ष जलाशय में तब्दील हो जाता है। इन सबके बीच जान जोखिम में डालकर 75 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हो रहे हैं। प्रधानाध्यापिका रंजना यादव ने बताया कि भवन की जर्जरता के संबंध में कई बार बीएसए कार्यालय को पत्र भेजा गया।
भीटी शिक्षाक्षेत्र के इस विद्यालय की छत पूरी तरह ढह गई है। बरामदा की छत भी जर्जर है। इसके अलावा एक अतिरिक्त कक्ष है, वह भी जर्जर हो चुका है। रंगरोगन कर बरामदे व अतिरिक्त कक्ष को लकदक कर दिया गया है, लेकिन वास्तव में दोनों बुरी तरह जर्जर है। बरामदे व जर्जर हो चुके अतिरिक्त कक्ष में जान जोखिम में डालकर छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने को विवश हो रहे हैं। बरसात होने पर दोनों की छत टपकती है। प्रधानाध्यापक जंगबहादुर ने बताया कि जर्जर भवन की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र के माध्यम से दे दी गई है।
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के जमुनीपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय का भवन बुरी तरह जर्जर हो चुका है। छतें इतनी अधिक जर्जर हो चुकी हैं कि जगह जगह न सिर्फ ईंट निकली हैं, बल्कि सरिया भी दिखाई पड़ रही हैं। बरसात होने पर कक्षों में पानी भर जाता ै। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। विद्यालय में पढ़ रहे 65 छात्र-छात्राओं को बीते कुछ दिनों से जर्जर भवन के पीछे स्थित अतिरिक्त कक्ष में शिक्षण कार्य चल रहा है। प्रधानाध्यापक रिजवान अहमद ने बताया कि इस सबंध में बीएसए कार्यालय को पत्र भेजा गया है।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक ऐसे विद्यालय हैं, जिनके भवन अत्यंत जर्जर हो चुके हैं, लेकिन उनका रंगरोगन कर कमीं को छिपाया गया है। भीटी, जलालपुर, आलापुर, टांडा व अकबरपुर क्षेत्र में ऐसे विद्यालयों को देखा जा सकता है, जिनकी दीवारें व छतें अत्यंत जर्जर हैं। कहीं की छतें क्षतिग्रस्त हैं, तो कहीं की दीवारें। विद्यालय की जर्जरता उजागिर न हो, इसके लिए उन्हें रंगरोगन कर चमका दिया गया है। यह अलग बात है कि संबंधित विद्यालय में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं की जान लगातार जोखिम में बनी रहती है।
बीते दिनों डीपीआरओ कार्यालय को पत्र भेजकर निर्देशित किया गया था कि जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, उन्हें काया कल्प योजना के तहत ग्राम प्रधान द्वारा दुरुस्त कराया जाए। ज्यादातर विद्यालयों को दुरुस्त भी करा दिया गया है। शीघ्र ही विद्यालयों का जायजा लिया जाएगा।
अतुल कुमार सिंह, बीएसए