अंबेडकरनगर। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को लेकर सरकारी सिस्टम की बेफिक्री हैरान कर देने वाली है। धांधली व हेराफेरी के मामलों में केस तो दर्ज होता है, लेकिन आरोपियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने को लेकर कोई कवायद नहीं दिखती है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकारी धन के गबन से जुड़े मामलों में भी कई-कई माह बाद तक चार्जशीट दाखिल नहीं हो पा रही है। अभियुक्तों की जमानत निरस्त करवाने में भी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है।
यह कहना कतई गलत नहीं होगा कि अंबेडकरनगर जिले में भ्रष्टाचार से निपटने की तस्वीर शासन के तमाम दावों से इतर है। यूं तो कागजों में तस्वीर काफी आकर्षक दिखती है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जाहिर है कि जब भ्रष्टाचार से निपटने की समीक्षा उच्च स्तर पर होती होगी तो आंकड़े काफी सुकून देते होंगे। हालांकि, भ्रष्टाचार के ज्यादातर मामलों में सारा फोकस सिर्फ केस दर्ज कराने तक ही सीमित है।
आरोपियों के विरुद्घ चार्जशीट दाखिल हुई या नहीं, यह देखने वाला कोई नहीं है। विवेचना सुस्त क्यों है, इस पर भी कोई अंकुश लगाता नहीं दिख पा रहा। जिन मामलों में अभियुक्तों ने गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा है, उसमें स्टे निरस्त करवाने की पैरवी की सुध भी जिम्मेदारों को नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि भ्रष्टाचार से आखिर मुकाबला कैसे हो पाएगा। पेश है एक रिपोर्ट।
बसखारी थाने में बीते दिनों चौदहवें वित्त आयोग की धनराशि खर्च करने में गड़बड़ी को लेकर केस दर्ज कराया गया था। इसमें सहायक विकास अधिकारी, बसखारी पंचायत, जयप्रकाश सिंह व सेवानिवृत्त सहायक विकास अधिकारी उमाशंकर यादव के विरुद्घ खंड विकास अधिकारी सविता सिंह ने करीब लाख रुपये की अनियमितता का केस दर्ज कराया था। केस दर्ज होने के बाद तेजी से विवेचना नहीं हो पा रही है।
एक-एक कर चार विवेचक अब तक बदल गए हैं। बीते 25 जून को केस दर्ज होने के बाद से किसी को यह परवाह नहीं रही कि मामले की विवेचना तेजी से करा दी जाए। यूं तो तमाम मामलों में विवेचना की समीक्षा होती रहती है, लेकिन यहां ध्यान क्यों नहीं दिया गया यह बड़ा प्रश्न है। मौजूदा विवेचक अनिल कुमार वर्मा ने बताया कि विवेचना में तेजी सुनिश्चित की जा रही है। बीते दिनों ही उन्हें विवेचना मिली है।
कटेहरी विकासखंड में नियमों व निर्देशों का उल्लंघन कर सरकारी खाते से धनराशि गबन के मामले में सहायक विकास अधिकारी पंचायत बृजेश कुमार सिंह, अखिलेश गौड़ व जगदंबा शुक्ल के विरुद्घ अहिरौली थाने में जिला विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने केस दर्ज कराया था। मामले ने काफी तूल पकड़ा था। आरोप था कि मनमाने ढंग से धनराशि की निकासी कर दुरुपयोग किया गया।
प्रशासन की सख्ती के बाद केस तो दर्ज हो गया, लेकिन आरोपियों पर चार्जशीट नहीं लग सकी। यह हाल तब है जब प्रशासन की प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी साबित हो चुकी है। पुलिस सिर्फ इसलिए सुस्त हो गई है क्योंकि आरोपियों ने न्यायालय से गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश ले रखा है। हालांकि, विवेचना तेज कर आरोपियों के विरुद्घ चार्जशीट दाखिल की जा सकती थी, लेकिन यहां प्रशासन ऐसा करा पाने में विफल रहा है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में धांधली का मामला जलालपुर में सामने आया था। इसमें भूमिहीनों व बच्चों के नाम पर खाता खोल कर धनराशि हड़प ली गई थी। मामले को सिर्फ अमर उजाला ने उठाया था। इसके बाद ही केस दर्ज हुआ था। इसमें मुरवाह के ग्राम प्रधान बोध प्रकाश उपाध्याय व प्राइमरी विद्यालय के अध्यापक रतन सिंह को नामजद किया गया था।
जलालपुर के उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी ने यह मामला दर्ज कराया था। इस बहुचर्चित मामले में न तो अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी तय हो पाई और न ही धांधली में शामिल अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका तय हो पाई है। पात्रों का सत्यापन करने व खाता खोलने आदि की प्रक्रिया में जिन भी अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका रही, उनकी जिम्मेदारी भी अब तक विवेचना में तय नहीं हो पाई है।
विकासखंड रामनगर की ग्राम पंचायत आमा दरवेशपुर के सरकारी सस्ते गल्ले के दुकानदार जयराम यादव के विरुद्ध राशन बेचने के आरोप में आलापुर थाने में केस दर्ज हुआ था। पांच अप्रैल को केस दर्ज होने के पांच माह बाद भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है। थाना प्रभारी के अनुसार, मामले की जांच अभी चल रही है। इसे अभी अभियोजन में भेजा जाएगा। वहां से जरूरी प्रक्रिया के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
भ्रष्टाचार के मामलों में केस दर्ज कराए गए हैं। ऐेसे मामलों में जरूरी कार्रवाई होगी। समय-समय पर समीक्षा होती रहती है।
- डॉ. पंकज कुमार वर्मा, एडीएम
भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में विवेचना तेजी से कराई जा रही है। किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होने दी जाएगी। किसी स्तर पर लापरवाही मिली तो जिम्मेदारी भी तय होगी।
- अवनीश कुमार मिश्र, एएसपी