विद्युतनगर/राजेसुल्तानपुर। सरयू नदी का जलस्तर 24 घंटे में तीन सेंटीमीटर बढ़कर खतरे के निशान से 14 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है, जिससे तटीय गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है।
नदी का पानी कहीं खेतों तक पहुंच गया है तो कहीं घरों के बेहद करीब बह रहा है। टांडा क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए किए गए काम भी पानी में डूबने लगे हैं। वहीं, राजेसुल्तानपुर में जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों को पिछली बाढ़ की परेशानियां याद आने लगी हैं और उन्हें पशुओं के लिए हरा चारा तथा फसल बचाने की चिंता सताने लगी है।
ठोकरें डूबने से कटान का खतरा बढ़ा
सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर पर उल्टहवा माझा, अवसानपुर, केवटला, डुहियां, महरीपुर माझा कला, माझा चिंतौरा, नैपुरा, सलोनाघाट और ढेलमऊ समेत कई गांवों के ग्रामीण लगातार नजर रखे हुए हैं। उल्टहवा माझा के प्रधान शिवप्रसाद ने बताया कि जालिम का पूरा, दिलशेन का पूरा और बाबूराम का पूरा के खेतों में पानी पहुंच गया है। वहीं, टांडा के छज्जापुर मोहल्ले में कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड द्वारा कराया गया काम पानी में डूब गया है। मुबारकपुर के आद्या प्रसाद दुबे, छोटू मांझी, रूपचंद्र मांझी और अखिलेश दुबे ने बताया कि ठोकर नंबर 22 डूब चुकी है और नदी घरों से महज दस फीट की दूरी पर बह रही है, जिससे ग्रामीणों को कटान की आशंका सता रही है। इसके अलावा, थिरुआ नाला में पानी बढ़ने से गौरागूजर और बेलहरी के पास फसलें डूब गई हैं। तहसीलदार गरिमा भार्गव ने बताया कि लेखपालों को जलस्तर की नियमित निगरानी और नावों व नाविकों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल किसी गांव के भीतर बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना नहीं है।
निचले इलाकों में भरा पानी, पर स्थिति नियंत्रित
राजेसुल्तानपुर। मांझा क्षेत्र में इस बार नदी का जलस्तर पिछले सभी रिकॉर्ड से अधिक होने के बावजूद स्थिति अभी नियंत्रण में है। नदी का पानी निचले रास्ते से होते हुए बंधे के किनारे तीन मजरों के करीब पहुंच गया है, लेकिन किसी भी मुख्य मार्ग पर पानी नहीं आया है। ग्रामीणों के सामने इस समय सबसे बड़ी चिंता जलस्तर के लगातार बढ़ने और पशुओं के लिए हरे चारे की है। उनका कहना है कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा, तो निचले इलाकों में मुश्किलें तेजी से बढ़ सकती हैं। तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव ने बताया कि जलस्तर जरूर बढ़ा है, लेकिन मांझा क्षेत्र में फिलहाल राहत है, किसी रास्ते पर पानी नहीं पहुंचा है और न ही अभी नाव चलाने की जरूरत पड़ी है। राजस्व कर्मी लगातार बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।