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300 बीघा फसल डूबी

Mon, 25 Jul 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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अंबेडकरनगर के सहिजना हमजापुर में माइनर की कटान से प्रभावित हुई सैकड़ों बीघा फसल। - फोटो : अमर उजाला
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नहर विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा तहसील क्षेत्र के सहिजना हमजापुर गांव समेत चार गांवों के 100 से अधिक किसानों को भुगतना पड़ा। रविवार देर रात जहांगीरगंज माइनर कटने के चलते 300 बीघा से अधिक फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई।
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सोमवार सुबह इसकी जानकारी होने पर संबंधित गावों के किसानों में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में किसान फसल को बचाने के लिए खेतों में पहुंच गए। सूचना मिलने पर पहुंचे नहर विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीणों के आक्रोश का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते माइनर की मरम्मत कर दी गई होती, तो उनकी फसलों को नुकसान होने से बचाया जा सकता था। बाद में कर्मचारियों ने ग्रामीणों की मदद से लगभग एक घंटे के प्रयास के बाद क्षतिग्रस्त रजवाहे की मरम्मत की।
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सोमवार सुबह तहसील अन्तर्गत सहिजना हमजापुर, रन्नापुर, नीवा व खत्मीपुर गांव के ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बनकर सामने आई। सुबह जब किसान अपने खेतों की तरफ गए, तो वहां का दृश्य देखकर सन्न रह गए। पूरी फसल जलमग्न हो चुकी थी।

दरअसल रविवार रात्रि किसी समय जहांगीरगंज रजवाहा कटने के चलते उसका पानी खेतों में पहुंचकर फसलों को अपनी चपेट में ले चुका था। किसी की धान की फसल जलमग्न हो गई, तो किसी की गन्ना फसल।

रजवाहे के पानी ने सब्जियों को भी अपनी चपेट में ले लिया था। रजवाहे का पानी तेजी से एक के बाद एक खेत को अपनी चपेट में लेता जा रहा था। यह देख वहां मौजूद किसानों ने गुहार मचा दी। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। कुछ ग्रामीणों ने स्वयं ही क्षतिग्रस्त स्थान की मरम्मत करने का प्रयास शुरू कर दिया।

बहाव अधिक होने के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। नहर विभाग को जानकारी दी गई, लेकिन सुबह आठ बजे तक कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। इस पर एसडीएम विनय कुमार गुप्त को सूचना दी गई। एसडीएम की फटकार के बाद जब नहर विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे, तो उन्हें ग्रामीणों के आक्रोा का सामना करना पड़ा।

विभागीय अध्किारियों व कर्मचारियों पर प्रभावित किसान दलजीत, राजवीर, जगदीश, संतराम, गंगाराम, जगन्नाथ आदि ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते क्षतिग्रस्त रजवाहे की मरम्मत कर दी गई होती, तो इस प्रकार की नौबत न आती।

बाद में कर्मचारियों ने ग्रामीणों की मदद से लगभग एक घंटे के अथक प्रयास के बाद मरम्मत कार्य पूर्ण किया। हालांकि तब तक चारों गांव के 100 से अधिक किसानों की 300 बीघा से अधिक फसल जलमग्न हो चुकी थी। 
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