इस बीच पिछले तीन दिनों से लगातार घना कोहरा पड़ने के चलते आलू की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना उत्पन्न हो गई है। किसान दवाओं के छिड़काव के साथ ही राख का भी छिड़काव कर फसल को पाले से बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
जिले में किसानों का आलू की खेती को लेकर ज्यादा जुड़ाव नहीं हो पा रहा है। जहां गत वर्ष 5200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती हुई थी, वहीं इस बार भी इतने ही क्षेत्रफल में आलू की बुवाई की गई है। गत वर्ष एक लाख 19 हजार 86 मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था।
इस बार भी उद्यान विभाग ने इतना ही आलू उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। मौसम के प्रतिकूल रुख को देखते हुए यह उत्पादन हो पाना आसान नजर नहीं आ रहा है। सिकरोहर के किसान बुद्धू ने कहा कि सरकार को आलू की पैदावार पर किसानों को अनुदान का प्रबंध करना चाहिए।
यह हैं प्रमुख रोग व उपचार
आलू की फसल में मुख्य रोग झुलसा है। इसमें पत्तियां पीली पड़ने के साथ ही सूखने लगती हैं। इसके लिए एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में दो किलोग्राम मैंकोजेब नामक दवा का घोल पानी में मिलाकर छिड़कने से आलू की फसल को लाभ मिलता है। फसलों पर प्रतिकूल असर न पड़े, इसके लिए सिंचाई कर फसल में नमी रखने का प्रयास किया जा रहा है।
‘अनुदान पर बीज उपलब्ध करा रहा विभाग’
जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ ने बताया कि आलू के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग अनुदान पर बीज आदि उपलब्ध करा रहा है। कोहरे से अभी फसल के प्रभावित होने के कोई आसार नहीं है। मैंकोजेब नामक दवा जिले में उपलब्ध है। इसका छिड़काव कर किसान अपनी फसल कोे पाला लगने से बचा सकते हैं।