फोटो 24, अंबेडकरनगर जनपद न्यायालय में वारंट के सिलसिले में पहुंचे माफिया अजय सिंह सिपाही।
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अंबेडकरनगर। माफिया व कटेहरी ब्लाक प्रमुख अजय सिंह सिपाही ने मंगलवार को आरोप लगाया कि राजनीतिक द्वेष के तहत उनका उत्पीड़न किया जा रहा। वे अपनी संपत्ति की जांच कराने को तैयार हैं, लेकिन अयोध्या जनपद के एक बाहुबली पूर्व विधायक की भी जांच कराई जाए। जांच में यह देखा जाए कि उनके पास सौ करोड़ से अधिक की संपत्ति कैसे अर्जित हुई। अजय ने कहा कि उनके पिता पुलिस चौकी प्रभारी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। ऐसे में उनके पेंशन के खाते को सीज करना अनुचित है।
जनपद न्यायालय के अधिवक्ता चैंबर के निकट मीडिया से मंगलवार को मुखातिब जिले के टॉप टेन बदमाशों की सूची में शामिल माफिया अजय सिंह सिपाही ने जिले के एक पूर्व मंत्री तथा अयोध्या के एक पूर्व विधायक पर साजिश रचकर उत्पीड़न कराने का आरोप लगाया। कहा कि पुलिस प्रशासन चाहे तो संपत्ति को लेकर शपथ पत्र दे सकता हूं, लेकिन माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी अयोध्या के बाहुबली पूर्व विधायक के पास सौ करोड़ की संपत्ति कहां से आई, इसकी जांच भी ईडी से करानी चाहिए।
उनकी नामी व बेनामी संपत्तियों की जांच होनी चाहिए। उनके जो रिश्तेदार मामूली हैसियत में थे, वे अचानक अमीर कहां से हो गए। निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अजय ने कहा कि प्रशासन ने अवैध व अनुचित ढंग से पिता चन्द्रभान सिंह का बैंक खाता सीज किया है। वे पुलिस चौकी प्रभारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्हें लाखों रुपए अलग-अलग फंड में मिले थे। इस रकम को ही अवैध मानकर जिस तरह से उनका पेंशन खाता बंद किया गया है, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री पत्र लिखने का दावा किया। कहा कि निष्पक्ष जांच होने पर ही न्याय मिलेगा। अजय ने कहा कि लोकनाथपुर गांव स्थित घर पैतृक है, जिसमें पिता व उनके दादा श्याम सहाय सिंह का पैसा लगा है। पुलिस 2018 में उस भूमि को कुर्क कर चुकी है, जो उनके व भाई के नाम थी।
एक तरफ पुलिस प्रशासन माफिया अजय सिंह सिपाही व उनके नजदीकी लोगों पर शिकंजा कस रही है तो दूसरी तरफ अजय ने मंगलवार को काफिले के साथ जनपद न्यायालय पहुंचकर सभी को चौंका दिया। महरुआ थाना क्षेत्र में हुए बहुचर्चित सुभाष हत्याकांड में अजय सिपाही के विरुद्ध वारंट है। उसे रिकाल कराने के लिए ही अजय कोर्ट पहुंचे। न्यायालय में जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अजय न सिर्फ मीडिया से मुखातिब हुए वरन आसानी से जिला मुख्यालय से चले भी गए।