एनटीपीसी में हुए हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच में अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है। आठ पन्ने की रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी विवेक ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए केस दर्ज करने का निर्देश दिया। अलीगंज थाने में श्रम परिवर्तन अधिकारी की तरफ से एनटीपीसी अधिकारियों के विरुद्ध केस दर्ज कर लिया गया।
डीएम ने केस दर्ज होने की पुष्टि की है। एनटीपीसी में 23 अगस्त को यूनिट नंबर एक में दोपहर बाद टर्बाइन के ऊपर बनी छत ढहने से इसकी चपेट में आकर एक मजदूर प्रदीप वर्मा की मौत हो गई थी। मामले में प्रथम दृष्टया एनटीपीसी अधिकारियों की लापरवाही सामने आई थी।
इसके बाद डीएम ने एसडीएम टांडा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी थी। एसडीएम टांडा नरेंद्र सिंह, सीओ राघवेंद्र मिश्र व श्रम प्रवर्तन अधिकारी विजय यादव ने जांच में एनटीपीसी अधिकारियों द्वारा बरती गई लापरवाही का जिक्र किया है।
इसमें पाया गया कि छत के डैमेज होने की जानकारी अधिकारियों को उसी दिन मिल गई थी, लेकिन उसे ठीक करने की तरफ ध्यान देने की बजाए पूरा जोर टर्बाइन व यूनिट नंबर एक को चालू रखने पर किया गया। वरिष्ठ प्रबंधक सिविल मधुपचंद्र यादव के बयान में सामने आया कि छत से पानी का रिसाव सुबह ही शुरू हुआ था, जबकि महाप्रबंधक प्रचालन सूर्यप्रकाश मुखर्जी ने स्वीकार किया कि मरम्मत के लिए प्लानिंग की जा रही थी, लेकिन मरम्मत नहीं हो पाई थी।
महाप्रबंधक एनटीपीसी एके सिन्हा ने बयान में बताया कि सवा दो बजे करीब छत गिर गई थी। उन्होंने 4 बजकर 53 मिनट पर एसडीएम टांडा को मामले की सूचना दी थी, जबकि जांच में पाया गया कि एसडीएम टांडा ने ही शाम को फोन मिलाया, तब घटना की जानकारी हुई।