स्कूलों व सार्वजनिक स्थानों के आसपास शोहदों की बढ़ती मौजूदगी रोकने के लिए जिले में लंबे समय से कोई अभियान नहीं चल सका है। लगभग एक दशक पूर्व तत्कालीन एएसपी ने यहां पुलिस के एक वाहन को मंजनू पिंजरा का रूप दिया था, जिसका काफी असर देखने को मिला था। इसके बाद से कोई प्रभावी कार्रवाई पुलिस-प्रशासन नहीं कर पाया है।
नतीजतन गर्ल्स कॉलेजों के आसपास सुबह और छुट्टी होने के वक्त शोहदों की भीड़ लगी रहती है। इसके चलते आए दिन छेड़छाड़ व अन्य घटनाएं होती रहती हैं। पुलिस-प्रशासन की ढिलाई के चलते जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित गर्ल्स कॉलेजों के आसपास शोहदों की भीड़ जमा रहती है और वे छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करते रहते हैं।
तमाम शिकायतों के बाद भी शोहदों के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। सुबह व छुट्टी के समय गर्ल्स स्कूल व कॉलेजों के आसपास होटलों, पान की दुकानों व अन्य स्थानों पर शोहदे मंडराने लगते हैं। छात्राओं के विद्यालय से निकलते ही अक्सर उन पर फब्तियां कसी जाती हैं।
कुछ शोहदे तो बाइक से छात्राओं का पीछा भी करते हैं। अधिकांश छात्राएं तो चुप रह जाती हैं, लेकिन कुछ छात्राएं हिम्मत जुटाकर ऐसे शोहदों की शिकायत न सिर्फ अपने अभिभावक, बल्कि विद्यालय प्रबंधन से भी करती हैं। शिकायत पुलिस-प्रशासन तक पहुंचती है, लेकिन ऐसे शोहदों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई को लेकर बीते लंबे समय से कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। नतीजतन शोहदों की सक्रियता विद्यालयों के आसपास लगातार बनी हुई है।
लगभग एक दशक पूर्व तत्कालीन एएसपी सुनील सक्सेना ने ऐसे शोहदों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए ऑपरेशन मंजनू चलाया था। इसके लिए उन्होंने बाकायदा एक पिंजरा बनवाया था। इसमें मंजनुओं को बंद करके पूरे नगर में घुमाया जाता था। नतीजा ये रहा कि जब तक सुनील सक्सेना जिले में रहे, तब तक विद्यालयों के समक्ष तो दूर आसपास भी शोहदे नहीं दिखते थे। सुनील सक्सेना के स्थानांतरण के बाद ये अभियान ठप पड़ गया।
बाद में वे यहां एसपी बनकर लौटे, लेकिन तब उन्हें भी इस अभियान की चिंता नहीं रही। इसके बाद से अब तक शोहदों के खिलाफ कोई अभियान नहीं चला। नतीजा ये रहा कि शोहदे बेखौफ होकर विद्यालयों के समक्ष मंडराते रहते हैं और आने-जाने वाली छात्राओं पर न सिर्फ फब्तियां कसते हैं, बल्कि छेड़छाड़ भी करते हैं। बीते दिनों ही जिला मुख्यालय स्थित एक विद्यालय में छुट्टी के बाद बाहर निकलते समय कुछ शोहदों ने एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की थी। इस पर मोहल्ले के दो-तीन लोग जुटे, तो शोहदे भाग गए थे।
अकबरपुर नगर की श्वेता वर्मा व नियाज फातिमा ने कहा कि जब तक उनकी बेटियां विद्यालय से घर वापस नहीं लौट आतीं, तब तक उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता लगी रहती है। कहा कि विद्यालयों के आसपास मंडराने वाले शोहदों के विरुद्ध पुलिस को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है।
अकबरपुर के ही राज नारायण शुक्ल व अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि जब तक शोहदों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक इस पर अंकुश नहीं लग सकता। कहा कि मौजूदा समय में जो माहौल है, उसमें बेटियों को घर के बाहर भेजते समय डर लगता है। जब तक वे घर नहीं पहुंच जातीं, तब तक उन्हें चिंता लगी रहती है।
बीएससी फाइनल की छात्रा प्रियंका व साक्षी ने कहा कि कॉलेज के आसपास के होटलों पर लगभग पूरे दिन अराजक तत्वों की भीड़ जमा रहती है। ऐसा नहीं है कि इनकी शिकायतें नहीं होती हैं। तमाम शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
एसपी पंकज का कहना है कि लंबे समय से स्कूल-कॉलेजों के निकट छेड़छाड़ या अभद्रता की कोई शिकायत सामने नहीं आई है। सभी थानेदारों को गर्ल्स कॉलेजों के आसपास दोनों समय सजग निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। इसका प्रभावी पालन भी हो रहा है।