थाना क्षेत्र अहिरौली अंतर्गत सोनावां गांव की बंद राइस मिल में चल रही अवैध शराब की फैक्ट्री का गोरखपुर से आई एसटीएफ टीम ने अहिरौली पुलिस की मदद से गुरुवार को भंडाफोड़ कर राइस मिल मालिक समेत चार शराब तस्करों को दबोच लिया। पुलिस ने फैक्ट्री से 65 हजार ब्रांडेड शराब की बोतल, बड़ी मात्रा में ब्रांडेड कंपनी का रैपर, खाली बोतलें व शराब बनाने का उपकरण बरामद किया है।
पुलिस ने मौके से काले रंग की स्कार्पियो, होंडा सिटी कार कार समेत दो बाइक व एक लाइसेंसी रिवाल्वर भी कब्जे में लिया है। पुलिस को गोरखपुर के तीन बड़े कारोबारियों की संलिप्तता मिली है। पुलिस ने केस दर्ज कर चारों आरोपियों का चालान कर कोर्ट भेजा। कोर्ट ने चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
पूर्वांचल में धड़ल्ले से बिक रही अवैध शराब की सूचना पर गोरखपुर एसटीएफ के पुलिस उपाधीक्षक एसटीएफ विकास चंद त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम अंबेडकरनगर के अहरौली थाने पहुंची। वहां से गुरुवार सुबह अहिरौली थानाध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह के साथ यादवनगर-महरुआ मार्ग पर सोनावां गांव स्थित एक बंद पड़ी राइस मिल में छापा मारा।
पुलिस ने घेरेबंदी कर राइस मिल में संचालित हो रही अवैध शराब की फैक्ट्री का पर्दाफाश कर चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान अकबरपुर नगर के शहजादपुर के सुरेश प्रताप सिंह, कुशीनगर जनपद के मठिया खुर्द के हीरालाल, बिहार प्रांत के सीवान जनपद पिड़ेरी के सुनील यादव व गोरखपुर जनपद के चौरा के विकास गौड़ के रुप में हुई है।
पुलिस की मानें तो सुरेश सिंह आदित्य एडिबल प्रा.लि./राइस मिल का मालिक है। पुलिस ने फैक्ट्री से 65 हजार बोतल देशी शराब समेत कई हजार खाली गत्ते, विभिन्न ब्रांड की छह बोरी खाली शीशी, फिल्टर व मशीन, एल्कोहल की मात्रा चेक करने का मीटर, ढक्कन पर लगाने वाला पांच गत्ता खुला होलोग्राम, ढक्कन से भरे पड़े 11 बड़े झाल, खाली शीशी से भरी पांच सौ बोरी, मिनरल वाटर के 70 खाली जार, 200 लीटर वाले कई दर्जन ड्रम भी पुलिस ने बरामद किया है।
छापे के दौरान 71 ड्रम स्प्रिट भी पुलिस ने बरामद किया। पुलिस को गोरखपुर के बड़े कारोबारी प्रदीप जायसवाल, संतोष जायसवाल और सौरभ जायसवाल की संलिप्तता की जानकारी मिली है। एसटीएफ की मानें तो राइसमिल मालिक सुरेश गोरखपुर के प्रदीप जायसवाल, संतोष और सौरभ के साथ मिलकर शराब का काला कारोबार कर रहा था।
सुरेश ने बताया कि लोन व देनदारी के चलते वर्ष 2002 में शुरू हुई राइसमिल वर्ष 2015 में बंद हो गई थी। प्रदीप ने 28अप्रैल2016 में छदम नाम विजयी से आरओ प्लांट का एग्रीमेंट भी कराया। कुछ दिन बाद ही यहां नकली देसी शराब बनने लगी। ये शराब गोरखपुर मंडल के अलावा आजमगढ़, बस्ती और फैजाबाद मंडल में लाइसेंसी दुकानों पर बेची जाती थी।
आरओ प्लांट खोलने के बाद इसमें तैयार होने वाले पानी को रेक्टीफाइड स्प्रिट में मिलाकर केमिकल की मदद से यहां नकली देसी शराब बनाई जाती थी। जो देसी शराब की दुकानों पर अलीगढ़ की वेब एंड व्रेबरीज लिमिटेड, गीडा की इंडिया ग्लाइको लिमिटेड डिस्टिलरी और सरैया डिस्टिलरी में बनने वाली ब्रांड के नाम पर बेची जाती थी।
पैकिंग के बाद यह शराब लाइसेंसी दुकानदारों को आधे दाम पर दी जाती थी। बरामद ब्रांडेड शराब में 50 शीशी वाले टाइगर ब्रांड के 65 गत्ते, बिना रैपर की 500 शीशी शराब, लैला ब्रांड का रैपर लगी 600 शीशी शराब, 45 शीशी वाली माधुरी ब्रांड के 565 गत्ते, 45 शीशी वाली बॉबी ब्रांड के 300 गत्ते, 50 शीशी वाले बुलेट नंबर एक ब्रांड के 150 गत्ते, 45 शीशी वाले लैला ब्रांड के 60 गत्ते, 45 शीशी वाले विंडसर नंबर एक ब्रांड के 244 गत्ते पुलिस ने बरामद किए।
सोनावां में पकड़ी गई अवैध फैक्ट्री में जिस स्प्रिट से शराब का निर्माण हो रहा था, वह घातक भी हो सकती है। कारण यह कि मौके से स्प्रिट बड़ी मात्रा में बरामद हुई। किसी भी बोतल में स्प्रिट की मात्रा अधिक हो जाने के चलते ही उसका प्रयोग जानलेवा हो जाता है। एथिल स्प्रिट से बनने वाली शराब जहरीली नहीं होती, जबकि मेथिल स्प्रिट से बनने वाली शराब जहरीली मानी जाती है।
अब यहां कौन सी स्प्रिट बरामद हुई, इसे लेकर आबकारी व पुलिस महकमा एक दूसरे पर ही जिम्मेदारी डाल दे रहा है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि बरामद स्प्रिट जहरीली भी हो सकती है। एसटीएफ की मानें तो 65 हजार बोतल देशी शराब की कीमत करीब 35 लाख रुपये है।
इसके अलावा 71 ड्रम स्प्रिट की कीमत 40 लाख है, लेकिन इस स्प्रिट से 62 हजार 400 लीटर देशी शराब बनाने की तैयारी थी। इस शराब की बिक्री में 2 करोड़ 15 लाख 50 हजार कीमत वसूली जाती। उधर, नकली शराब की फैक्ट्री में 22 अगस्त को एक टैंकर रेक्टीफाइड स्प्रिट लाई गई थी। इससे तैयार आधे से ज्यादा माल दुकानदारों को बेच दिया।
सीओ विकास त्रिपाठी ने बताया कि 22 अगस्त को हाईवे से होकर गुजरने वाले रेक्टीफाइड स्प्रिट से भरे टैंकरों की सप्लाई देने वाले गैंग को भी चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी।एसपी अजय सिंह ने बताया कि अवैध शराब फैक्ट्री के संचालन के कनेक्शन गोरखपुर से जुड़े हैं।
पूछताछ में कुछ अहम जानकारी मिली है। पकड़े गए आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। विवेचना चल रही है। कारोबार में शामिल कुछ और नाम उजागर होंगे तो उन्हें भी विवेचना में शामिल कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।