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Ambedkar Nagar News: 13,196 लोगों की काउंसिलिंग, सिर्फ 86 ने छोड़ा तंबाकू

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 शहर के रेलवे स्टेशन के पास गुटखा की दुकान व खरीदते लोग। संवाद
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अंबेडकरनगर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से तंबाकू का सेवन न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके लिए सीएमओ कार्यालय से लेकर जिला अस्पताल तक टीम बनी हुई है इसके बाद भी जागरूकता का कोई असर धरातल पर नहीं दिख रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम तंबाकू की बिक्री हो रही है और नाबालिग भी सेवन कर रहे हैं।
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तंबाकू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर बड़े पैमाने पर बजट भी खर्च हो रहा है लेकिन सुधार कोई नहीं हो रहा है। इस वर्ष में जिले में अब तक 13,196 लोगों की जिला अस्पताल में काउंसिलिंग कराई गई, जिसमें काफी प्रयास के बाद मात्र 86 लोगों ने तंबाकू का सेवन छोड़ा दिया है। हालांकि अभी इसमें 3299 लोगों की दवा चल रही है। यह दवा लगभग छह माह तक खानी पड़ती है। अब तक 421 लोगों को पान मसाला खाते पकड़ा गया है। 39,475 रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
अन्य विभाग नहीं ले रहे जिम्मेदारी
वैसे तो तंबाकू उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग को प्रमुख माना गया है। अन्य सभी विभागों को भी सहयोगी बनाया गया है जिसमें उनके कार्यालय में अगर कोई पान, मसाला व सिगरेट पीता है तो वहां पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए और उससे जुर्माना वसूला जाए। इसमें केवल स्वास्थ्य विभाग ही यह कार्रवाई कर रहा है। नगर पालिका, पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, शिक्षा विभाग सहित अन्य किसी विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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शिक्षा विभाग नहीं दे सका आंकड़ा
नशे के खिलाफ अभियान चलाने और स्कूलों और कॉलेजों के पास होने वाली दुकानों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर बीएसए व डीआईओएस को कई बार पत्र लिख कर आंकड़ा मांगा गया है, लेकिन वह भी आज तक कोई आंकड़ा नहीं दे सके। ऐसे में 500 मीटर के नए मानक का अनुपालन तो दूर 100 मीटर का भी अनुपालन नहीं हो पा रहा है। अकबरपुर शहर में फ्लाईओवर के नीचे बीएन इंटर कॉलेज, बीएनकेवी डिग्री कॉलेज, जीजीआईसी और सेंट पीटर्स कॉलेज का संचालन हो रहा है। यह सभी विद्यालय बमुश्किल 500 मीटर की दूरी में स्थापित हैं। इतनी ही दूरी में कम से कम 10 पान-गुटखा की दुकानें संचालित हो रही हैं।
केस एक- चार माह से छोड़ दिया गुटखा

अकबरपुर के डइयाडीह के रहने आकाश वाहन चालक हैं। लंबे समय से वह पान गुटखा का सेवन करते थे। लगातार काउंसलिंग और दवाओं के सेवन के चलते चार माह से गुटखा का सेवन छोड़ दिया है। आकाश ने बताया कि उन्हें लगा कि अभी इससे किनारा कर लेना ठीक है।
गुटखा और सिगरेट को दी मात

कटेहरी के रहने वाले शीतला प्रसाद ने बताया कि वह गुटखा और सिगरेट का सेवन करते थे। कुछ दिन पूर्व वह जिला अस्पताल आए थे जहां पर जुर्माना गया था। उसके बाद उनके मन में इस लत को छोड़ने की इच्छा जाहिर हुई। काउंसलिंग कराने के लिए आने लगे, जहां पर धीरे-धीरे दवा खाना शुरू किया और अब पूरी तरीके से इन सभी चीजों से दूरी बना ली। वह बताते हैं कि इससे स्वास्थ्य पर खासा सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

जागरूकता के साथ की जाती है कार्रवाई

तंबाकू उन्मूलन कार्यक्रम के तहत माह में अलग-अलग स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर इसका सेवन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई व चेतावनी भी दी जाती है। जिला अस्पताल में काउंसलिंग कक्ष बना हुआ है। जहां पर लोगों की काउंसिलिंग करा कर उन्हें इसके सेवन से दूरी बनवाई जाती है।
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- डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, एसीएमओ
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