अंबेडकरनगर। धनाभाव के चलते करीब दो माह से कम्युनिटी किचन व बस किराये के नाम पर खर्च हुए पैसे का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इसके चलते बस संचालक व कैटर्स आए दिन कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। विभागीय अधिकारी भी कोई समुचित जवाब नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि भुगतान के लिए प्रशासन द्वारा शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो इन दोनों भुगतान के लिए 99 लाख 94 हजार रुपए की जरूरत है। इसके लिए शासन को पत्र भी भेजा गया है। इसी माह के अंत तक धनराशि मिलने की उम्मीद है।
बताते चलें कि कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन होने पर शासन प्रशासन की तरफ से गैर प्रांतों से वापस लौट रहे श्रमिकों व स्थानीय गरीबों के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए जिला मुख्यालय के अलावा टांडा, आलापुर, भीटी, जलालपुर व बसखारी आदि नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत व तहसील मुख्यालय सहित कुल 15 सार्वजनिक स्थानों पर कम्युनिटी किचन स्थापित किया गया था। इसमें बड़ी संख्या में नागरिक भोजन के लिए भी पहुंच रहे थे।
महामारी के दौरान श्रमिकों व गरीबों के लिए यह कम्युनिटी किचन वरदान साबित हुआ था। प्रशासन ने इसके सुचारु संचालन पर पूरा फोकस भी किया था। इसके सुचारु संचालन व गुणवत्तापरक भोजन तैयार करने के लिए टेंडर के माध्यम से कैटर्स का चयन हुआ था। इसके अलावा विभिन्न प्रांतों से ट्रेनों के माध्यम से अकबरपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले श्रमिकों को विभिन्न क्वारंटीन सेंटरों पर पहुंचाने के लिए प्राइवेट बसों को लगाया गया था। लॉकडाउन के दौरान यह सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हुईं। इसके लिए शासन ने 7 करोड़ 52 लाख 89 हजार रुपए का भुगतान भी किया था। इसके सापेक्ष प्रशासन ने 7 करोड़ 46 लाख 30 हजार 174 रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
करीब चार माह तक जिले में यह सेवा चलती रही। इसके लिए कैटर्स व बसों का करीब 99 लाख 94 हजार रुपए बकाया हो गया। दो माह से यह सेवा बंद हो चुकी है। परन्तु धनाभाव के चलते कैटर्स व बसों का किराया भुगतान नहीं हो पा रहा है। इससे कैटर्स व बस संचालक आए दिन कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन द्वारा उन्हें भरोसा दिलाया जा रहा है कि जल्द ही भुगतान सुनिश्चित हो जाएगा। नाम न छापने की शर्त पर एक कैटर्स ने बताया कि बकाया भुगतान न होने से अब मुश्किलें बढ़ रही हैं। जिन दुकानों से उन लोगों ने खाद्य सामाग्रियां उठायी थीं, उनके क्रोध का भी शिकार होना पड़ रहा है। परन्तु प्रशासन सिर्फ यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है कि जल्द ही भुगतान हो जाएगा।
कैटर्स व बसों के बकाए भुगतान को लेकर शासन से पत्राचार चल रहा है। बीते दिनों ही दोबारा रिमाइंडर भेजा गया है। उम्मीद है कि इसी माह के अंत तक शासन से भुगतान प्राप्त हो जाएगा। आवश्यक रकम मिलते ही बकाएदारों का प्राथमिकता पर भुगतान सुनिश्चित होगा।
डॉ पंकज कुमार वर्मा, एडीएम