जलालपुर में शनिवार को अलम पर फूल पेश कर दुआएं मांगती महिलाएं।संवाद
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। कर्बला के 72 शहीदों की याद में सवा दो माह से चल रही अजादारी का शनिवार को अमारी और अलविदाई मातम के जुलूस के साथ समापन हो गया। आठ रबीउल अव्वल को निकले जुलूसों में अकीदतमंदों ने नौहा-मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश की। शिया समुदाय के 11वें इमाम हजरत इमाम हसन अस्करी की शहादत पर ताबूत भी बरामद किया गया।
नगपुर ग्राम पंचायत के मुस्तफाबाद मजरे में अंजुमन रौनक-ए-इस्लाम के तत्वावधान में अमारी का ऐतिहासिक जुलूस निकला। मौलाना अतहर मेहदी की तकरीर के बाद शुरू हुआ जुलूस देर शाम अलविदाई तकरीर के साथ संपन्न हुआ। वहीं, जाफराबाद स्थित अलीगंज दरबार हुसैनी में अंजुमन रौनक-ए-अजा की ओर से मास्टर मुजफ्फर हुसैन की मजलिस के बाद अलविदाई मातम का जुलूस निकाला गया, जो रौजा-ए-हजरत अब्बास पर मौलाना मेहंदी हसन की तकरीर के साथ समाप्त हुआ।
जुलूस में अंजुमन हुसैनिया जाफराबाद, काजिमया, जाफरिया रजिस्टर्ड, जुल्फिकारिया, अजा-ए-हुसैन, जाफरिया नेशनल, अब्बासिया, आले इबा, जफरूल ईमान और हुसैनिया उस्मानपुर समेत कई अंजुमनों ने नौहे पढ़े। मौलाना नूरुल हसन, मौलाना सईद हसन, मौलाना रईस हैदर, मौलाना फिरदौस और मौलाना मेहंदी हसन वाइज ने हुसैनी काफिले के मदीना पहुंचने की दास्तान बयान की।
मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष इब्ने अली जाफरी, हकीम जुल्फिकार हुसैन, मुजाहिद हुसैन, अली अकबर और अली जहीर ने आयोजन में सहयोग के लिए जिला प्रशासन और पुलिस का आभार जताया।