आर्थिक संकट से जूझ रहे इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के रामपुर दुर्गापुर के पुरवे तिवारीपुर निवासी कृष्णकुमार तिवारी (45) वर्ष ने रविवार देर शाम एक ऐसा फैसला लिया, जिसने लोगों को भी हिलाकर रख दिया। कृष्णकुमार का पूरा परिवार लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था।
परिवार में आय का एकमात्र साधन कृष्णकुमार द्वारा होमगार्ड के तौर पर की जाने वाली नौकरी थी। इस एकमात्र नौकरी पर इन दिनों 90 वर्षीय मां शंकरादेवी व पत्नी गीता (41) के अलावा 6 अन्य बेटियां ललिता तिवारी (20), सुधा (18), संध्या (16), साधना (14), सौम्या (9) व अंजलि (6) वर्ष आश्रित थीं।
वे अपनी सबसे बड़ी बेटी सरिता का लगभग चार वर्ष पूर्व फैजाबाद जनपद के गोशाईगंज थाना क्षेत्र के रेवरी गांव में किसी तरह विवाह कर चुके थे। उनके पास कुल डेढ़ बीघा भूमि थी, जिसमें बीते दो वर्ष से आर्थिक संकट के चलते कोई अनाज पैदा ही नहीं कर पाए। उनका बीपीएल कार्ड तक नहीं बन पाया था।
इन्हीं सबके चलते वे काफी तनाव में थे। आर्थिक संकट के चलते वे शादी के योग्य हो रही अपनी दो बेटियों ललिता व सुधा के विवाह को लेकर पिछले काफी दिनों से खासे परेशान थे। इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि यदि इन दोनों का जल्दी विवाह न हुआ, तो आगे संध्या का विवाह भी कैसे समय पर हो सकेगा।
इन्हीं सब उथल पुथल के बीच अकबरपुर कोतवाली में ड्यूटी कर कृष्णकुमार रविवार दिन में वापस गांव लौटे। यहां से वे कुछ देर बाद बाजार गए और सायं लगभग एक कुंतल चावल खरीदकर ले आए। इसके बाद काफी देर तक गुमसुम होकर घर में ही बैठे रहे। रात्रि आठ बजे करीब वे शौच के लिए निकले।
काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। देर रात गांव के बाहर तालाब के किनारे काली मंदिर के निकट स्थित एक आम के पेड़ से उनका शव लटका पाया गया।
शव मफलर के सहारे लटक रहा था। यह देख परिजनों में चीख पुकार मच गया। कुछ देर में ही बड़ी तादाद में और भी ग्रामीण एकत्र हो गए। देर रात पुलिस भी मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर उसने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।