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घने कोहरे की चपेट में आया पूरा जिला, जनजीवन अस्त व्यस्त

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अंबेडकरनगर में इस तरह घने कोहरे में यात्रा करने को मजबूर हो रहे राहगीर। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। रविवार को भोर से ही समूचा जिला घने कोहरे की चपेट में आ गया। सर्द हवा व कोहरे के चलते बढ़ी गलन से लोग ठिठुर उठे। आम जनजीवन अस्त व्यस्त नजर आया। रविवार के अवकाश के चलते सरकारी व निजी कार्यालयों के कर्मचारी ज्यादातर समय घरों में कैद रहे। इससे पहले शनिवार देर शाम से ही घना कोहरा लगभग समूचे जिले में छा गया था। रविवार दोपहर तक कोहरा छाए रहने का असर सामान्य दिनचर्या पर साफ देखने को मिला। स्कूलों व कार्यालयों में अवकाश के चलते ज्यादातर लोग घरों में ही कैद रहे। बाजारों में दुकानें भी देर से खुलीं। दोपहर बाद कुछ देर के लिए धूप तो निकली, लेकिन उसका कोई खास फायदा नागरिकों को नहीं मिल पाया।
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मौसम में सुधार होने का नाम नहीं ले रहा। तापमान में उतार चढ़ाव लगातार जारी है। शनिवार जब दोपहर बाद धूप निकली, तो उम्मीद बंधी थी कि शायद अब मौसम साफ हो जाए। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। शनिवार देर शाम से ही घने कोहरे का प्रकोप शुरू हो गया। रविवार सुबह की शुरूआत भी घने कोहरे से हुई। पूर्वान्ह तक जारी कोहरे के प्रकोप व सर्द हवा से तापमान में तेजी से गिरावट आई। नतीजा यह रहा कि लोग घरों में ही कैद हो गए। आम जनजीवन घने कोहरे की चपेट में आने से पूरी तरह अस्त व्यस्त रहा।
रविवार के अवकाश के चलते सरकारी व निजी कार्यालयों में कार्य करने वाले कर्मचारी घरों से दोपहर तक निकले ही नहीं। मौसम खराब होता देख ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी गांव से बाहर निकलने की बजाए जगह जगह अलाव जलाकर ठंड से बचाव का प्रयास करते दिखे। इसी का नतीजा रहा कि दोपहर तक प्रमुख बाजारों व मार्गों पर लगभग सन्नाटे का माहौल रहा।
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दोपहर बाद धूप निकली, तो ठंड से ठिठुर रहे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद हुई। हालांकि सर्द हवा चलने से धूप राहत नहीं दे सकी। धूप निकलने सेे बाजारों में कुछ चहल पहल बढ़ी, लेकिन शाम होते होते जब मौसम में फिर से परिवर्तन शुरू हुआ, तो लोग जल्दी जल्दी काम निपटाकर अपने अपने घर चलते बने। इससे समय से पहले ही बाजारों में सन्नाटा पसर गया।
कोहरे ने बढ़ाई किसानों की चिंता
रविवार को एक बार फिर से घना कोहरा छाने से किसानों की चिंता बढ़ गई। किसान रामदयाल व राधेश्याम ने कहा कि कुछ दाल वाली फसलें लगभग तैयार हो होने को है। यदि कोहरे का प्रकोप आगे भी इसी प्रकार जारी रहा, तो इससे फसल को पाला पडने की संभावना है। यदि ऐसा हुआ, तो इससे आर्थिक नुकसान होगा। किसान गंगाराम व मेवालाल ने कहा कि आमतौर पर जनवरी के प्रथम सप्ताह में ही मौसम साफ हो जाया करता था, लेकिन इस बार लगता है कि पूरी जनवरी ही ऐसा रहेगा। यदि जनवरी के अंत तक मौसम का मिजाज इसी प्रकार का रहा, तो इससे दलहनी व तिलहनी फसलों को तो नुकसान होगा ही, गेहूं की फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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