तीन दिनों से सुबह से ही तेज धूप निकलने के बाद गुरुवार को एक बार फिर से अचानक मौसम खराब हो गया। सुबह जब लोग सोकर उठे तो चारों तरफ घना कोहरा पाया। समूचा जनपद दोपहर तक घने कोहरे की चपेट में रहा। इससे एक तरफ जहां आम जन-जीवन अस्तव्यस्त हो गया, वहीं सड़क पर लाइट जलाकर वाहन चलाना पड़ा।
हालांकि दोपहर बाद धूप निकली लेकिन तपिश अधिक न होने के चलते लोगों को राहत नहीं मिल सकी। घने कोहरे के प्रकोप ने फिर से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खींच दीं। उनका कहना है कि यदि इसी तरह लगातार घना कोहरा छाया रहा तो इसका प्रतिकूल प्रभाव फूल वाली फसलों पर पड़ेगा। गौरतलब है कि दिसंबर की शुरुआत से ही घने कोहरे का प्रकोप शुरू हो गया था।
हाड़कंपाऊ ठंड ने लोगों को पूरी तरह मुश्किलों में डाल दिया था। इस बीच तीन दिनों से सुबह से ही लगातार निकल रही तेज धूप के चलते तापमान में भी कुछ वृद्धि हुई थी। इससे कड़ाके की ठंड से जूझ रहे लोगों ने काफी राहत महसूस की थी। हालांकि गुरुवार को एक बार फिर मौसम ने पलटी मारी। लोग जब सुबह सोकर उठे तो उन्हें चारों तरफ घना कोहरा दिखाई दिया।
सर्द हवा चलने से तापमान में तेजी से गिरावट हुई। नतीजतन इसका प्रतिकूल प्रभाव आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ा। लोगों ने देर से बिस्तर छोड़ा तो सड़कों पर लोगों को वाहन की लाइट जलाकर चलने को मजबूर होना पड़ा। घने कोहरे के चलते जिंदगी रेंगकर चलने को मजबूर हुई। दोपहर बाद धूप निकली जरूर लेकिन लेकिन तपिश अधिक न होने के चलते आमजन को इसका लाभ नहीं मिल सका।
उधर, एक बार फिर से घने कोहरे के प्रकोप ने किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें उत्पन्न कर दीं। अकबरपुर के किसान रामधारी व संतराम, कटेहरी के किसान धनंजय तथा भीटी के किसान रामबख्श सिंह ने कहा कि यदि घने कोहरे का प्रकोप इसी प्रकार आगे भी जारी रहा तो इसका प्रतिकूल प्रभाव फूल वाली फसलों सरसों, मटर व आलू पर पड़ सकता है।
कड़ाके की ठंड के बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर अलाव नहीं जल सके। इससे लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह लोग निजी अलाव की व्यवस्था कर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
लोगों का कहना था कि प्रशासन को आमजन की कोई सुध नहीं है। इतना ही नहीं, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों में अब तक कंबल का भी वितरण नहीं हो सका। इससे ऐसे लोगों को ठंड की रात गुजारने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।