आलापुर(अंबेडकरनगर)। सतत और व्यापक मूल्यांकन केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रत्येक छात्र के अधिगम पथ की जीवंत ट्रैकिंग है। यदि आकलन सतत और योजनाबद्ध हो, तो शिक्षकों को यह जानने में देरी नहीं लगती कि छात्र किस बिंदु पर पिछड़ रहे हैं और कहां उन्हें लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
ब्लॉक संसाधन केंद्र रामनगर में संचालित एनसीईआरटी व एनएफएल आधारित शिक्षकों के चौथे चक्र के प्रशिक्षण के चौथे दिन शनिवार को शिक्षण की गुणवत्ता पर चर्चा हुई। प्रमुख संदर्भदाता शैलेंद्र कुमार ने प्रशिक्षण में बताया गया कि मूल्यांकन के माध्यम से न केवल छात्र की प्रगति को रिकॉर्ड किया जा सकता है, बल्कि उसी आधार पर शिक्षण विधियों को लचीला और प्रभावी बनाया जा सकता है। शिक्षकों को कक्षा 4 व 5 में भाषा और गणित विषयों के लिए उपचारात्मक शिक्षण योजना की संकल्पना से जोड़ा गया। शैलेंद्र कुमार ने 4+2 मॉडल की चर्चा करते हुए बताया कि चार दिवस नियमित शिक्षण के लिए और दो दिवस विशेष सहायता के लिए निर्धारित हों। संदर्भ दाता त्रिशूलधारी पांडेय ने कहा कि बिना सुविचारित शिक्षण योजना के कोई भी शिक्षक गुणवत्तापूर्ण कक्षा संचालन नहीं कर सकता। कक्षा 4 और 5 के लिए भाषा व गणित विषयों का साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक के साथ दिवसवार विभाजन अनिवार्य रूप से तैयार करें। उन्होंने कहा कि दृश्य, श्रव्य और स्पर्श आधारित संसाधन, जैसे फ्लैशकार्ड, कहानी चित्र, ज्यामितीय मॉडल, संख्या कार्ड आदि छात्रों के लिए अमूर्त अवधारणाओं को ठोस अनुभव में बदलने का कार्य करते हैं।